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121 किमी पैदल चलकर CM योगी को जल चढ़ाने पहुंचे छात्र कांवड़िये, पुलिस ने उंगली तोड़ी, गर्दन दबाई – आरोप

गोंडा से लखनऊ तक पैदल यात्रा के बाद CM आवास के बाहर रोके गए कांवड़िये, छात्रों ने कहा – “हम अपने भगवान को जल चढ़ाने आए थे”

लखनऊ। गोंडा के छात्र कांवड़ियों का जत्था जब लखनऊ पहुंचा, तो उनके चेहरे पर श्रद्धा और आंखों में एक ही लक्ष्य था — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गंगाजल अर्पित करना। लेकिन जब वे सीएम आवास के पास पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें रोक दिया और कथित तौर पर बलपूर्वक बस में भरकर इको गार्डन भेज दिया गया

कांवड़ियों का आरोप है कि इस दौरान कई छात्रों के साथ मारपीट की गई, एक की उंगली तोड़ दी गई, तो किसी की गर्दन दबा दी गई।


“हम अपने भगवान को जल चढ़ाने आए थे” – छात्रों की भावुक अपील

एक छात्र कांवड़िये ने मीडिया से बात करते हुए कहा,

“हम गोंडा से नंगे पैर, भक्ति भाव से 121 किमी चलकर लखनऊ आए। हमारा सपना था – अपने आराध्य योगी जी को जल चढ़ाएं। लेकिन पुलिस ने हमें धक्का दिया, मारा और अपमानित किया।”

कुछ छात्रों ने आंसुओं के साथ अपने अनुभव साझा किए, जिसमें पुलिस द्वारा ‘जबरदस्ती बस में ठूंसने’, गालियां देने और मारने के आरोप शामिल थे।


पुलिस की सफाई: सुरक्षा कारणों से की गई कार्रवाई

लखनऊ पुलिस के अनुसार,

“कांवड़ियों को सीएम आवास के बाहर रुकने की अनुमति नहीं थी। सुरक्षा कारणों से उन्हें वहां से हटाकर इको गार्डन भेजा गया। किसी भी प्रकार की मारपीट नहीं हुई है।”

हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो छात्रों के आरोपों को बल देते दिख रहे हैं, जिनमें पुलिस के हाथों छात्रों को खींचते और बस में ठूंसते देखा जा सकता है।


कांवड़ यात्रा और राजनीति का टकराव

कांवड़ यात्रा को लेकर अक्सर राजनीतिक और धार्मिक भावनाएं जुड़ी रहती हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भक्तों की आस्था को प्रशासनिक प्रक्रियाओं से टकराना चाहिए?

छात्रों का कहना है कि वे सीएम योगी को सिर्फ जल अर्पण कर सम्मान देना चाहते थे, किसी राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं थे।


भविष्य में बढ़ सकती है असंतोष की लहर

धार्मिक रूप से प्रेरित इस यात्रा के साथ पुलिस की कथित बर्बरता को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना तेज हो गई है
धार्मिक संगठन और छात्र संगठन दोनों ही इस पर स्पष्टीकरण और माफी की मांग कर सकते हैं।


निष्कर्ष:

भक्ति और प्रशासनिक सीमा रेखा के बीच एक बार फिर संवेदनशील मुद्दा सामने आया है। छात्र कांवड़ियों की आस्था को जिस तरह जवाब मिला, वह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का संकेत है, बल्कि जनभावनाओं की अनदेखी भी। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।

News Desk

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