नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी सांसदों की क्रॉस-वोटिंग को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा ने विपक्ष के सांसदों को ₹15-20 करोड़ रुपए की रिश्वत देकर खरीदा है। इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात ही नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और उन्हें इस महत्वपूर्ण पद पर चुने जाने की बधाई दी। इस मुलाकात ने विवादों को और बढ़ा दिया, क्योंकि विपक्ष का आरोप है कि यह साजिश का हिस्सा है।
🔹 TMC का आरोप:
TMC सांसद ने कहा,
“मुझे विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि भाजपा ने विपक्ष के हर सांसद को ₹15-20 करोड़ में खरीदने का प्रयास किया। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि यह धनबल से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
🔹 भाजपा का जवाब:
वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह विपक्ष में फूट डालने की साजिश है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा,
“I.N.D.I.A. गठबंधन में आपसी मतभेद पहले से चल रहे हैं। विपक्ष अपनी असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।”
🔹 राजनीतिक हलचल और भविष्य की रणनीति:
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला अगले लोकसभा चुनावों को लेकर रणनीतिक खेल का हिस्सा हो सकता है। विपक्ष को आक्रोशित जनता की भावना का सहारा लेते हुए भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलना है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष में असंतोष का संकेत बता रही है।
🔹 जनता की प्रतिक्रिया:
सोशल मीडिया पर #CrossVotingControversy और #CPRadhakrishnan ट्रेंड कर रहे हैं। आम नागरिक इस विवाद को लोकतंत्र के लिए खतरा मान रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
🔹 आगे की प्रक्रिया:
वर्तमान में चुनाव आयोग और संबंधित कमेटियां इस मामले की जांच में जुटी हैं। आने वाले दिनों में विस्तृत जांच रिपोर्ट जारी होने की संभावना है। राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है और आने वाले दिनों में नया मोड़ आ सकता है।


