काठमांडू: नेपाल में राजनीतिक संकट के बीच एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। आज सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में पद ग्रहण करेंगी। यह फैसला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
Gen-Z नामक वर्चुअल समूह ने एक विशेष वर्चुअल मीटिंग में सुशीला कार्की के नाम पर मुहर लगाई है। इस मीटिंग में 3543 सदस्यों ने सुशीला कार्की के नेतृत्व को समर्थन दिया, जबकि कुल 5000 सदस्यों ने इसमें भाग लिया था।
राजनीतिक परिदृश्य:
नेपाल में पिछले दो दिनों से जारी अस्थिर राजनीतिक स्थिति के चलते जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका था। विपक्षी दलों और सरकार के बीच तीव्र संघर्ष के बीच यह नया फैसला राजनीतिक स्थिरता की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मीडिया से बातचीत में सीधे भारत का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि भारत ने नेपाल में राजनीतिक तख्तापलट करवाने में भूमिका निभाई है। यह बयान क्षेत्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर रहा है।
सुशीला कार्की का प्रोफाइल:
सुशीला कार्की नेपाल की सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं। उन्होंने अपने करियर में भ्रष्टाचार विरोधी कई अहम फैसले दिए हैं। उनकी न्यायिक कार्यशैली को ईमानदार और निर्भीक माना जाता है। सुशीला कार्की की नियुक्ति को देश में न्यायपालिका और राजनीतिक व्यवस्था के संतुलन के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया:
देश के आम नागरिक और राजनीतिक विश्लेषक इसे एक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #SushilaKarkiPM और #NepalPolitics ट्रेंड कर रहे हैं। नागरिक उम्मीद जता रहे हैं कि सुशीला कार्की अपने निष्पक्ष और ईमानदार नेतृत्व से देश को राजनीतिक स्थिरता प्रदान करेंगी।
आगे का रास्ता:
सुशीला कार्की आज आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगी। इसके बाद उनका पहला कार्य प्रशासनिक सुधारों को लागू करना और देश में शांति बहाल करना होगा।


