रिपोर्ट- प्रकाश सिंह
लखनऊ/गोंडा। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित दिशा (DISHA) समिति की बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब कर्नलगंज से विधायक अजय सिंह ने जिले के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अनिल तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए। विधायक ने बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि CMS न तो जनप्रतिनिधियों के फोन उठाते हैं और न ही जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं।
विधायक अजय सिंह ने बताया कि उन्होंने एक गंभीर मामले को लेकर लगातार चार घंटे में पांच बार CMS को फोन किया, लेकिन एक भी कॉल रिसीव नहीं की गई। विधायक ने इसे व्यक्तिगत अनदेखी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता के प्रति लापरवाही बताया।
“जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा जनता की उपेक्षा है” – अजय सिंह
दिशा बैठक के दौरान विधायक अजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा,
“जब किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या या जनहित के काम के लिए CMS से संपर्क किया जाता है और वह फोन तक नहीं उठाते, तो यह सिर्फ विधायक का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता का अपमान है। यह दर्शाता है कि अधिकारी कितनी गैर-जिम्मेदारी से अपने दायित्व निभा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिख रहा। इसका सीधा असर आम मरीजों और ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है।
दिशा समिति के अध्यक्ष कीर्तिवर्धन सिंह भी हुए सख्त
विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद दिशा समिति के अध्यक्ष और सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने भी मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने बैठक में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि CMS द्वारा फोन न उठाने और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के मामले को लिखित रूप में दर्ज कर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारी यह समझें कि वे जनता और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेह हैं। इस टिप्पणी के बाद बैठक का माहौल और अधिक गंभीर हो गया।
स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत आई सामने
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। सरकारी अस्पतालों में इलाज, दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की मौजूदगी और मरीजों की सुनवाई को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अब जिले के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी पर इस तरह के आरोप लगना व्यवस्था की गंभीर विफलता की ओर इशारा करता है।
बैठक में उठे अन्य मुद्दे भी पीछे छूटे
सूत्रों के अनुसार, दिशा समिति की बैठक में स्वास्थ्य के अलावा पोषण, महिला एवं बाल विकास, स्वच्छता और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की जा रही थी। हालांकि CMS प्रकरण के बाद पूरा फोकस स्वास्थ्य विभाग पर आ गया और अन्य मुद्दे पीछे छूट गए।
अब क्या हो सकती है कार्रवाई
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि CMS डॉ. अनिल तिवारी से जल्द ही स्पष्टीकरण तलब किया जा सकता है। इसके साथ ही उच्च स्तर से अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी संभव मानी जा रही है। वहीं क्षेत्रीय नागरिकों और विधायक समर्थकों ने मांग की है कि ऐसे अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में जनता की उपेक्षा न हो।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
इस घटनाक्रम के बाद जिले से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्ष ने इसे सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता बताया है, जबकि सत्तापक्ष के भीतर भी अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर असंतोष की आवाजें सुनाई देने लगी हैं।
दिशा समिति की बैठक में उठा CMS प्रकरण केवल एक फोन कॉल का मामला नहीं, बल्कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीर कार्रवाई करता है या मामला केवल बैठक की नाराजगी तक सीमित रह जाता है। जनता की नजरें अब अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



