टोक्यो/लखनऊ: जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित उत्तर प्रदेश निवेश रोड शो में उस समय माहौल उत्साह से भर गया जब देश-विदेश के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने खुलकर उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन से पहले ही उद्योगपतियों ने मंच से कहा कि बीते 9 वर्षों में प्रदेश में जो बदलाव आया है, वह किसी “मेगा ट्रांसफॉर्मेशन” से कम नहीं है।
रोड शो के दौरान ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश को भारत का उभरता हुआ औद्योगिक विकास इंजन बताया। उनका कहना था कि पहले जहां यूपी को मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता था, वहीं अब यह देश का सबसे विश्वसनीय निवेश गंतव्य बन चुका है।

9 वर्षों में बदली धारणा, बदली दिशा
Maruti Suzuki के कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने अपने संबोधन में कहा कि लगभग 9 साल पहले तक उत्तर प्रदेश को मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के रूप में नहीं देखा जाता था। लेकिन नई सरकार के गठन के बाद राज्य ने व्यापक परिवर्तन का अनुभव किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी को हर क्षेत्र में नंबर एक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। इस लक्ष्य की दिशा में जो नीतिगत सुधार और प्रशासनिक कदम उठाए गए, उनके परिणाम कुछ ही वर्षों में स्पष्ट दिखाई देने लगे। आज उत्तर प्रदेश राजस्व संग्रह, वित्तीय अनुशासन, मोबाइल निर्माण, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, कृषि उत्पादन, वृक्षारोपण, एथेनॉल उत्पादन, हस्तशिल्प निर्यात और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति से नई रफ्तार
राहुल भारती ने विशेष रूप से राज्य की इलेक्ट्रिक और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस नीति के कारण उत्तर प्रदेश देश में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की वृद्धि दर के मामले में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है।
सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इस उपलब्धि के बावजूद सरकार के राजस्व में कोई कमी नहीं आई, बल्कि राजस्व में वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने यूपी की नीतिगत संरचना को “वाइब्रेंट पॉलिसी इकोसिस्टम” बताया और कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था, त्वरित निर्णय क्षमता और शीघ्र क्रियान्वयन उद्योगों के लिए भरोसेमंद वातावरण तैयार करते हैं।
ऑटो कंपोनेंट कंपनियां जैसे Subros और Spark Minda पहले से ही उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं, जो राज्य के ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम को मजबूती प्रदान कर रही हैं।

“स्केल, स्पीड और स्टेबिलिटी” का मॉडल
रोड शो में Minda Corporation Limited के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आकाश मिंडा ने कहा कि आज का उत्तर प्रदेश “स्केल, स्पीड और स्टेबिलिटी” का मजबूत उदाहरण बन चुका है। आधुनिक एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, औद्योगिक हब और सक्रिय नीतियों के माध्यम से राज्य एक सशक्त मैन्युफैक्चरिंग आधार तैयार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश भारत की सबसे बड़ी कार्यबल और तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। इस लिहाज से यह केवल एक निवेश स्थल नहीं, बल्कि जापानी कंपनियों के लिए दीर्घकालिक औद्योगिक सफलता का लॉन्चपैड है।

45 दिन में जमीन आवंटन, निवेशकों का बढ़ा भरोसा
आकाश मिंडा ने बताया कि स्पार्क मिंडा की उत्तर प्रदेश में 14 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां संचालित हैं, जिनमें 6000 से अधिक लोग कार्यरत हैं। इनमें 500 से अधिक दिव्यांगजन भी शामिल हैं।
उन्होंने विशेष रूप से यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में लगभग 2 लाख वर्ग मीटर भूमि का मात्र 45 दिनों में आवंटन होने का उल्लेख किया। उनके अनुसार यह राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की गति और पारदर्शिता का स्पष्ट प्रमाण है।

3000-4000 रोजगार का बड़ा ऐलान
रोड शो के दौरान मिंडा कॉर्पोरेशन ने इलेक्ट्रॉनिक्स बैकवर्ड इंटीग्रेशन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल मोबिलिटी के क्षेत्र में निवेश की घोषणा की। इस निवेश से अगले 2-3 वर्षों में 3000 से 4000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
यह घोषणा न केवल उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देगी, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को नई मजबूती मिलेगी और सप्लाई चेन इकोसिस्टम भी सुदृढ़ होगा।

कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार की भूमिका
उद्योगपतियों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी राज्य में निवेश का सबसे बड़ा आधार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता होती है। उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में कानून-व्यवस्था की स्थिति में हुए सुधार ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।
त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और फाइलों के शीघ्र निस्तारण की प्रक्रिया ने निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने में मदद की है। यही कारण है कि अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां उत्तर प्रदेश को प्राथमिकता दे रही हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर बना गेम चेंजर
राज्य में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार, फ्रेट कॉरिडोर, एयरपोर्ट विकास और औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाएं निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है और उत्पादन इकाइयों की दक्षता बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यही गति बनी रही तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

जापानी निवेशकों के लिए अवसर
टोक्यो में आयोजित रोड शो का उद्देश्य जापानी निवेशकों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराना था। जापान की कई कंपनियां ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश का उभरता औद्योगिक ढांचा उनके लिए दीर्घकालिक साझेदारी का अवसर प्रदान करता है।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत-जापान औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश एक रणनीतिक केंद्र बन सकता है।

आर्थिक विकास की नई कहानी
उत्तर प्रदेश लंबे समय तक कृषि प्रधान राज्य के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अब यह औद्योगिक विकास की नई कहानी लिख रहा है। मोबाइल निर्माण में अग्रणी बनने से लेकर एथेनॉल उत्पादन और हस्तशिल्प निर्यात तक, राज्य बहुआयामी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई निवेश-उन्मुख नीतियों और प्रशासनिक सुधारों ने प्रदेश की छवि को बदला है। उद्योग जगत की सकारात्मक प्रतिक्रिया इस बदलाव की पुष्टि करती है।
टोक्यो निवेश रोड शो ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उत्तर प्रदेश अब केवल संभावनाओं का राज्य नहीं, बल्कि अवसरों का साकार मंच बन चुका है। उद्योगपतियों द्वारा “मेगा ट्रांसफॉर्मेशन” की संज्ञा दिया जाना इस बात का प्रमाण है कि बीते वर्षों में राज्य ने ठोस प्रगति की है।
मिंडा कॉर्पोरेशन द्वारा 3000-4000 रोजगार सृजन की घोषणा आने वाले समय में औद्योगिक विस्तार और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यदि सरकार और उद्योग जगत के बीच यही तालमेल बना रहा, तो उत्तर प्रदेश जल्द ही देश की आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो सकता है।


