वाराणसी: के रविदास घाट पर गुरुवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। गंगा के बीचों-बीच चल रहे गंगोत्री क्रूज में अचानक तेज धमाका हुआ। चारों ओर धुआं फैल गया और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान आसमान से हेलिकॉप्टर की आवाज गूंजी और कुछ ही सेकंड में NSG कमांडो रस्सियों के सहारे क्रूज पर उतरते दिखाई दिए।
यह सब किसी फिल्म की शूटिंग नहीं, बल्कि काशी में की गई NSG की हाई-रिस्क एंटी-टेरर मॉकड्रिल का हिस्सा था।
कैसे हुआ पूरा ऑपरेशन?
क्रूज में धमाका – अफरा-तफरी का माहौल
गंगोत्री क्रूज में बैठे पर्यटक अचानक धमाके से दहशत में आ गए। ब्लास्ट के बाद धुआं फैलने लगा और यात्रियों की सुरक्षा चुनौती बन गई।
हेलिकॉप्टर की एंट्री – NSG कमांडो ने मोर्चा संभाला
कुछ ही पलों में ऊपर से ब्लैक कैट कमांडो का हेलिकॉप्टर क्रूज के ऊपर मंडराने लगा।
कमांडो ने हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे एक-एक कर उतरना शुरू किया।
क्रूज पर आतंकियों से मुठभेड़
कमांडो ने:
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क्रूज का कंट्रोल अपने हाथ में लिया
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यात्रियों को सुरक्षित हिस्सों में शिफ्ट किया
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आतंकियों को चारों तरफ से घेर लिया
कुछ ही मिनटों में आतंकियों को ‘न्यूट्रलाइज’ कर दिया गया।
पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया
ऑपरेशन के बाद कमांडो ने सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकास द्वारा बाहर निकाला।
इस कार्रवाई को देखने के लिए घाट पर बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए थे।
काशी में मॉकड्रिल क्यों महत्वपूर्ण?
वाराणसी धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से बेहद संवेदनशील शहर है। यहां पहले भी कई आतंकी वारदातें हो चुकी हैं।
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संकट मोचन मंदिर पर हमला
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भजन गायक गुलशन कुमार की हत्या
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भीड़भाड़ वाले घाट और मंदिरों को लगातार खतरा
इन कारणों से यहां बड़े स्तर की सुरक्षा जांच और मॉकड्रिल बेहद जरूरी मानी जाती है।
इस मॉकड्रिल का उद्देश्य था—
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संवेदनशील जगहों पर आतंकियों से निपटने की तैयारी
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एंटी-टेरर ऑपरेशन में त्वरित प्रतिक्रिया
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पुलिस, PAC, NSG और प्रशासन के बीच तालमेल


