मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र से समाज और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाली एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी, जिसके साथ उसके 21 वर्षीय पड़ोसी ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया था, अब उसी आरोपी युवक की पत्नी बन चुकी है। यह फैसला किसी आपसी सहमति या न्याय के तहत नहीं, बल्कि समाज के दबाव, ताने और बदनामी के डर से किशोरी के असहाय परिवार द्वारा मजबूरी में लिया गया है।
ऐसे हुआ खुलासा
मामला तब सामने आया जब आठ दिन पहले किशोरी के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। चिंतित परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए। मेडिकल जांच में किशोरी के तीन माह की गर्भवती होने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह जानकर परिवार सदमे में आ गया।
काफी पूछने और समझाने-बुझाने के बाद, मासूम किशोरी ने अपने साथ हुए अत्याचार की कहानी बताई। उसने खुलासा किया कि उसके पड़ोस में रहने वाले 21 वर्षीय युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। बताया जाता है कि किशोरी को इस बात का ज्ञान भी नहीं था कि वह गर्भवती कैसे हो गई। डॉक्टर के सामने उसने भोलेपन से कहा था कि उसकी तो अभी शादी ही नहीं हुई है, तो गर्भ कैसे हो सकता है। डॉक्टर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्यार से उसे सच्चाई बताने को कहा, जिसके बाद किशोरी ने पड़ोसी युवक का नाम लिया।
सामाजिक ताने बने अभिशाप
इस घटना के सामने आने के बाद किशोरी की मां ने गांव में पंचायत बुलाई। शुरुआती तौर पर कार्रवाई की बात हुई, लेकिन इसके बाद गांव के ही युवक किशोरी के भाई को ताने मारने लगे। परिवार के लिए घर से बाहर निकलना भी दूभर हो गया।
किशोरी की मां ने बताया कि उनके पति लंबे समय से बीमार हैं, और घर का सारा बोझ उन्हीं पर है। उनकी इस कमजोरी का फायदा उठाकर पड़ोसी युवक ने यह घिनौना काम किया। सामाजिक शर्मिंदगी और अपमान के आगे टूटी मां ने रोते हुए कहा कि उनके चार बच्चे हैं, और छोटी बेटी की शादी की चिंता है। गांव में हो रही बातों से उनके बच्चे मानसिक रूप से टूट रहे हैं।
मजबूरी में कराया रेपिस्ट से विवाह
समाज के तानों, बदनामी और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे नकारात्मक असर से टूटकर, किशोरी की मां ने आरोपी युवक के परिवार से बात की। अंततः, दो दिन पहले गांव के एक मंदिर में किशोरी और दुष्कर्म के आरोपी युवक की शादी करा दी गई। यह फैसला परिवार ने किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई, पुलिस या न्याय से पहले सामाजिक ‘इज्जत’ बचाने के नाम पर लिया।
पीड़ित मां अब इस पूरे घटनाक्रम और गांव के माहौल से इतनी निराश हैं कि उन्होंने अपने बच्चों को इन तानों से मुक्ति दिलाने के लिए गांव छोड़कर कहीं और बसने का मन बना लिया है।


