देशभर: में बुधवार को 150वां संविधान दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान के अनुवादित संस्करण को 9 नई भाषाओं— मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया में जारी किया।
उन्होंने कहा कि इससे संविधान अधिक से अधिक भारतीयों तक उनकी मातृभाषा में पहुंच पाएगा, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी। इस मौके पर राष्ट्रपति ने संविधान की प्रस्तावना भी पढ़ी।
राष्ट्रपति: तीन तलाक खत्म करना महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि संसद ने तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराई को खत्म कर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
उन्होंने बताया कि GST स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार है जिसने देश की आर्थिक एकता को मजबूत किया है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि:
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अनुच्छेद 370 हटना एक ऐसी बाधा को समाप्त करना था जो देश की राजनीतिक एकता में रुकावट बनी हुई थी।
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नारी शक्ति वंदन कानून महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के एक नए युग की शुरुआत करेगा।
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इस वर्ष 7 नवंबर से ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति: संविधान के मुख्य निर्माता हैं डॉ. अंबेडकर
अपने दूसरे संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि 26 नवंबर 1949 को इसी केंद्रीय कक्ष में संविधान सभा ने भारत का संविधान तैयार किया था।
उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान का मुख्य निर्माता बताते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व के कारण आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।
उपराष्ट्रपति: बिहार और जम्मू कश्मीर में भारी वोटिंग लोकतंत्र की ताकत
उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि:
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए चुनावों में लोगों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया।
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हाल ही में बिहार चुनावों में महिलाओं ने रिकॉर्ड मतदान कर भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत किया।
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यह लोकतंत्र के मुकुट में एक और “कीमती हीरा” जोड़ने जैसा है।
उन्होंने कहा कि संविधान बुद्धि, अनुभव, बलिदान और करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं से जन्मा है, जिसने साबित किया है कि भारत एक था, एक है और हमेशा एक रहेगा।
लोकसभा अध्यक्ष: संविधान सभा के नायकों को नमन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि इस अवसर पर हम:
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संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद,
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संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर,
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और सभी सदस्यों को
श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
उन्होंने कहा कि संविधान ने देश को न्याय, समानता, बंधुत्व और सम्मान का अधिकार दिया है और पिछले सात दशकों में इसी मार्गदर्शन में भारत ने अनेक नीतियां बनाईं और कई उपलब्धियां हासिल कीं।
इतिहास: संविधान क्यों नहीं लागू हुआ 26 नवंबर को?
भारतीय संविधान को संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अपनाया, लेकिन इसे लागू 26 जनवरी 1950 को किया गया।
इस दिन का चयन इसलिए हुआ क्योंकि:
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26 जनवरी 1930 को कांग्रेस ने पहली बार “पूर्ण स्वराज” का नारा दिया था।
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1930 से 1947 तक 26 जनवरी को ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जाता रहा।
यही कारण था कि 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर इसे गणतंत्र दिवस बनाया गया।
संविधान की मूल कॉपी— एक कलाकृति
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संविधान की मूल अंग्रेजी कॉपी प्रेम बिहारी रायजादा ने अपने हाथों से लिखी।
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इसमें 6 महीने लगे और 432 निब घिस गईं।
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यह 13 किलो की पांडुलिपि पार्चमेंट पेपर पर लिखी गई।
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संविधान के हर भाग में चित्रकारी है — राम-सीता से लेकर अकबर और टीपू सुल्तान तक के चित्र।
इन्हें शांति निकेतन के नंदलाल बोस और उनकी टीम ने तैयार किया।
संविधान की हिंदी कॉपी वसंत कृष्ण वैद्य ने हाथ से लिखी, जिसका वजन 14 किलो है।
ग्वालियर रियासत के कानूनों का संविधान में प्रभाव
दिलचस्प तथ्य यह है कि आजादी से पहले ग्वालियर रियासत में बने कुछ कानून इतने उन्नत थे कि:
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संविधान में समान अधिकार, विशेष कानून,
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तेज न्याय,
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लैंड रिकॉर्ड की स्पष्टता,
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क्वारेंटाइन कानून
जैसे कई प्रावधान उनसे ही प्रभावित हैं।
ग्वालियर रियासत का खसरा फॉर्मेट, पंचायत बोर्ड की व्यवस्था, और बीमारी रोकथाम से जुड़े नियम आधुनिक कानूनों जैसे ही थे।


