नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र का आज नौवां दिन है और चुनाव सुधार, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) तथा कथित वोट चोरी जैसे मुद्दों पर आज भी दोनों सदनों में हंगामे की आशंका है।
गुरुवार को लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को खुला चैलेंज देते हुए कहा था कि वह उनकी तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए वोट चोरी के मुद्दों पर डिबेट करें।
राहुल के इस चैलेंज पर शाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि “30 साल से सदन में हूं, मैंने कभी ऐसा नहीं देखा… मेरे भाषण का क्रम मैं तय करूंगा।” सदन में कई बार हंगामा हुआ और अंत में कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया।
राहुल–शाह के बीच तीखी बहस
नीचे लोकसभा में कल हुए प्रमुख संवाद—
अमित शाह:
“विपक्ष के नेता की तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस का जवाब दूंगा—एक सादी वाली, एक एटम बम वाली और एक हाइड्रोजन बम वाली…”
राहुल उन्हें बीच में रोकते हैं।
राहुल गांधी:
“शाह जी, मैं आपको चैलेंज करता हूं। मेरी तीनों प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा करें।”
शाह (आवाज़ ऊँची करते हुए):
“30 साल से संसद में चुनकर आया हूं। मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा, आप नहीं।”
राहुल:
“शाह जी का रिस्पॉन्स डरा हुआ है, घबराया हुआ है।”
शाह:
“मैं उकसावे में नहीं आऊंगा। हमने तो नहीं कहा कि नेता विपक्ष झूठ बोल रहे हैं।”
इसके बाद गृह मंत्री ने राहुल गांधी के तीन सवालों के जवाब दिए।
राहुल गांधी के 3 सवालों पर शाह के जवाब
1. चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से CJI को क्यों हटाया गया?
शाह ने कहा कि—
- 73 साल तक चुनाव आयुक्त नियुक्ति का कोई कानून नहीं था
- प्रधानमंत्री ही सीधे नियुक्ति करते थे
- सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता मांगी, इसलिए नया कानून बना
- मौजूदा प्रावधान पूर्व प्रक्रिया से अलग नहीं है
2. चुनाव के 45 दिन बाद CCTV फुटेज क्यों डिलीट किए?
- जनप्रतिनिधित्व कानून 1991 में प्रावधान है कि 45 दिन बाद चुनौती संभव नहीं
- CCTV “संवैधानिक दस्तावेज” नहीं, आंतरिक प्रबंधन का हिस्सा
- कोई भी 45 दिन के भीतर अदालत से फुटेज मांग सकता है
3. क्या 2023 में कानून बदलकर चुनाव आयुक्त को इम्युनिटी दी गई?
- शाह ने कहा कि 1951 के कानून जैसा ही प्रावधान आज भी है
- कोई अतिरिक्त इम्युनिटी नहीं दी गई
SIR, चुनाव सुधार और विपक्षी हंगामा
गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन के दौरान विपक्ष ने कई बार आपत्ति जताई। भाषण के दौरान शाह की जुबान से एक आपत्तिजनक शब्द भी निकल गया, जिसे लेकर विपक्ष भड़क गया।
शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि “2014 के बाद से भाजपा की जीत पर विपक्ष कौ-कौ-कौ करता है।”
10 नए बिल भी पेश होंगे
शीतकालीन सत्र में सरकार कुल 10 नए बिल पेश करने वाली है। इनमें प्रमुख हैं—
1. एटॉमिक एनर्जी बिल
- पहली बार निजी (भारतीय और विदेशी) कंपनियों को न्यूक्लियर प्लांट लगाने की अनुमति
- अभी तक केवल NPCIL ही संयंत्रों का संचालन करती है
2. हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल
- UGC, AICTE, NCTE जैसी एजेंसियों को समाप्त कर एक राष्ट्रीय आयोग बनाने की योजना
- सरकार का दावा—उच्च शिक्षा व्यवस्था सरल और प्रभावी बनेगी
SIR की प्रक्रिया को 9 सवाल–जवाब में समझिए
1. SIR क्या है?
यह वोटर लिस्ट अपडेट करने की चुनाव आयोग की विशेष प्रक्रिया है।
- 18+ नए वोटर्स जोड़े जाते हैं
- मृत/शिफ्ट हुए/डुप्लीकेट नाम हटते हैं
- नाम–पते की गलतियां सुधारी जाती हैं
- BLO घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं
2. SIR किन राज्यों में चल रहा है?
कुल 12 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश—
अंडमान निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
3. पहले कहाँ हुआ?
पहला चरण बिहार में—7.42 करोड़ वोटर्स अंतिम सूची में शामिल।
4. कौन कर रहा है यह काम?
- 12 राज्यों में लगभग 51 करोड़ वोटर
- 5.33 लाख BLO
- 7 लाख+ BLA
5. पूरा शेड्यूल क्या है?
(आपके इनपुट में शेड्यूल की तारीखें नहीं थीं; चाहें तो मैं EC की प्रक्रिया अनुसार जोड़ सकता हूँ।)
6. SIR वाले राज्यों में विधानसभा चुनाव कब?
(रिपोर्ट में यह जानकारी उपलब्ध नहीं थी।)
7. वोटर को क्या करना होगा?
- BLO/BLA द्वारा दिए गए फॉर्म की जानकारी मिलाना
- एक से अधिक जगह नाम होने पर कटवाना
- नाम न होने पर नया फॉर्म भरना
8. कौन से दस्तावेज मान्य?
पेंशनर कार्ड, सरकारी ID, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, 10वीं मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, NRC में नाम, परिवार रजिस्टर, भूमि/मकान आवंटन पत्र, आधार कार्ड आदि।
9. SIR का उद्देश्य क्या है?
2004 के बाद पूरा SIR नहीं हुआ। इस दौरान—
- माइग्रेशन
- डुप्लीकेट एंट्री
- मृत वोटरों के नाम
- विदेशी नागरिकों की गलत एंट्री
जैसी स्थितियों को सुधारना आवश्यक है ताकि वोटर लिस्ट पूरी तरह शुद्ध हो।
निष्कर्ष:
संसद का नौवां दिन भी टकरावपूर्ण रहने की संभावना है। चुनाव सुधार और SIR को लेकर सरकार–विपक्ष के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। राहुल गांधी और अमित शाह के बीच बहस ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वहीं SIR को लेकर चल रही राष्ट्रीय प्रक्रिया आने वाले चुनावों को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली है।


