मुरादाबाद: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कंटेंट को लेकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी लगातार बढ़ रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में Meta के एक अलर्ट के आधार पर बाल यौन शोषण से संबंधित वीडियो का मामला सामने आया है। पुलिस की जांच के बाद जिले में इस तरह के Meta Alert से जुड़ी पहली कार्रवाई की गई और एक व्यक्ति के खिलाफ IT Act की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत में सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने की मांग तेज हुई है। Meta ने भी हाल ही में भारत में बाल-सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी सीधे भारतीय साइबर अपराध व्यवस्था तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई है।
Meta Alert से पुलिस तक पहुंची जानकारी
जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, मुरादाबाद पुलिस को Meta की ओर से एक अलर्ट मिला। इसमें इंटरनेट मीडिया पर बाल यौन शोषण से संबंधित एक वीडियो पोस्ट किए जाने की जानकारी थी।
पुलिस ने अलर्ट के आधार पर संबंधित सामग्री को सुरक्षित किया और मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि वीडियो किस सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया था और उसे अपलोड करने वाला व्यक्ति कौन है।
जांच आगे बढ़ने पर संबंधित अकाउंट की पहचान भोजपुर क्षेत्र के फतेहपुर निवासी नदीम के रूप में किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद वीडियो को सुरक्षित तरीके से पेन ड्राइव में लेकर स्थानीय पुलिस को उपलब्ध कराया गया।
महिला और बच्चे की पहचान की कोशिश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाली महिला और बच्चे की पहचान करने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने इसके लिए कई स्तर पर प्रयास किए, लेकिन महिला और बच्चे का पता नहीं चल सका।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी वीडियो में किसी व्यक्ति के दिखाई देने मात्र से उसकी पहचान या घटना की पूरी परिस्थितियां स्वतः प्रमाणित नहीं हो जातीं। पुलिस की जांच का उद्देश्य संबंधित व्यक्तियों की पहचान, वीडियो के स्रोत और उसके प्रसार की परिस्थितियों को स्पष्ट करना है।
नाबालिग से संबंधित संवेदनशील सामग्री की पहचान, उसका प्रसार या उसे दोबारा साझा करना गंभीर कानूनी मामला हो सकता है। इसलिए ऐसी किसी सामग्री को सोशल मीडिया पर आगे शेयर करने के बजाय संबंधित प्लेटफॉर्म या साइबर अपराध पोर्टल को रिपोर्ट करना जरूरी है।
IT Act की धाराओं में FIR
पुलिस की जांच के बाद भोजपुर थाने में नदीम के खिलाफ IT Act की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह मुरादाबाद जिले में Meta Alert के आधार पर बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री को लेकर दर्ज किया गया पहला मामला है।
FIR दर्ज होने के बाद जांच का अगला चरण यह पता लगाना होगा कि सामग्री किस परिस्थिति में पोस्ट की गई, उसका स्रोत क्या था और उसे आगे किस स्तर तक प्रसारित किया गया। इन सवालों का जवाब पुलिस की विस्तृत डिजिटल जांच से सामने आएगा।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि FIR दर्ज होना आरोप की शुरुआत है, दोष सिद्ध होना नहीं। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
Meta पर क्यों बढ़ी निगरानी?
यह मामला भारत में Meta के खिलाफ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती निगरानी के बीच सामने आया है। सितंबर 2026 में Meta ने कहा कि वह भारत में बाल-सुरक्षा से जुड़े मामलों को सीधे Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के साइबर क्राइम पोर्टल तक रिपोर्ट करेगा। इससे पहले कंपनी ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग मुख्य रूप से अमेरिका स्थित National Center for Missing and Exploited Children (NCMEC) के माध्यम से करती थी।
इससे पहले केंद्र सरकार ने Instagram पर बाल यौन शोषण से जुड़े कथित कंटेंट और विज्ञापनों को लेकर Meta से जवाब मांगा था। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी NCPCR ने भी इस मामले में जांच शुरू की और Meta के अधिकारियों को तलब किया था।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गई है। फर्जी अकाउंट, आपत्तिजनक कंटेंट, शोषणकारी सामग्री और निजी तस्वीरों के दुरुपयोग जैसे मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
Meta जैसी कंपनियां कंटेंट की पहचान के लिए तकनीकी सिस्टम और मॉडरेशन व्यवस्था का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन मुरादाबाद का यह मामला यह भी दिखाता है कि किसी अलर्ट के बाद स्थानीय पुलिस की डिजिटल जांच कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।
सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच बढ़ते समन्वय का उद्देश्य ऐसे मामलों में सूचना मिलने से लेकर कार्रवाई तक का समय कम करना है। I4C का National Cyber Crime Reporting Portal भी महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए विशेष व्यवस्था रखता है।
आगे क्या होगी पुलिस की कार्रवाई?
अब जांच में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट, पोस्ट की परिस्थितियों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। पुलिस यह भी देख सकती है कि संबंधित सामग्री कहां से प्राप्त हुई और क्या इसे किसी अन्य व्यक्ति या प्लेटफॉर्म तक भेजा गया था।
मामले में आगे की कार्रवाई डिजिटल साक्ष्य, आरोपी के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगी। पुलिस द्वारा वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान का प्रयास भी जारी रहने की बात सामने आई है।


