नई दिल्ली / ढाका: भारत और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कट्टर विरोधी बांग्लादेशी नेता उस्मान हादी के जनाजे में शनिवार को लाखों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ढाका के मानिक मिया एवेन्यू और संसद भवन के आसपास हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। दोपहर 2:30 बजे संसद भवन के साउथ प्लाजा में जनाजे की नमाज अदा की गई, जिसके बाद हादी को बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया।
“हम शोक मनाने नहीं, न्याय मांगने आए हैं”
इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने जनाजे के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा,
“हम यहां शोक मनाने नहीं आए हैं, हम अपने भाई के लिए न्याय की मांग करने आए हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि हादी की हत्या के एक हफ्ते बाद भी हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जाबेर ने सरकार को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया और कहा कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
संसद में घुसने की कोशिश की खबरें
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जनाजे के बाद हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद में घुसने की कोशिश की, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। हालात को देखते हुए सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
भारत विरोधी मार्च और सीमा पर तनाव
हादी की मौत के विरोध में इंकलाब मंच और जमात के कट्टरपंथियों ने शुक्रवार को बेनापोल से भारत-बांग्लादेश सीमा तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपा जाए।
चटगांव में चंद्रनाथ मंदिर के बाहर भी कट्टरपंथियों द्वारा धार्मिक नारेबाजी की गई।
भारतीय सेना अलर्ट मोड में
बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा और भारत विरोधी गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सेना अलर्ट पर है।
ईस्टर्न कमांड प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने गुरुवार शाम भारत-बांग्लादेश सीमा का दौरा कर हालात की समीक्षा की।
मोहम्मद यूनुस का भावुक भाषण
संसद में नमाज के बाद अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने कहा,
“लाखों लोग आज यहां आए हैं। लोग सड़क पर लहरों की तरह उमड़ रहे हैं। हादी हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे, जब तक बांग्लादेश अस्तित्व में रहेगा।”
हिंसा और आगजनी की घटनाएं
हादी की मौत के बाद ढाका में हालात बेकाबू हो गए।
- उदिची शिल्पी गोष्ठी के कार्यालय में आगजनी
- देश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रथोम आलो के दफ्तरों को निशाना बनाया गया
- कई दुकानों और इमारतों को जलाया गया
यूनुस सरकार पर गंभीर आरोप
सूत्रों के मुताबिक, यूनुस सरकार ने दंगाइयों को फ्री हैंड दिया। आरोप है कि करीब दो घंटे तक पुलिस और सेना मौके पर नहीं पहुंची।
राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि सरकार 12 फरवरी के चुनाव टालने की रणनीति पर काम कर रही है।
अवामी लीग पर प्रतिबंध है, जबकि बीएनपी नेता तारिक रहमान 25 दिसंबर को लंदन से ढाका लौटने वाले हैं। ऐसे में कट्टरपंथी जमात के मजबूत होने और यूनुस के दोबारा राष्ट्रपति बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
हिंदू युवक की हत्या, 7 गिरफ्तार
इस बीच, बांग्लादेश के मयमनसिंह में ईशनिंदा के आरोप में 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
भीड़ ने युवक को नग्न कर फांसी दी और बाद में शव को जला दिया।
अंतरिम सरकार ने बताया कि रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनकी उम्र 19 से 46 साल के बीच है।
उस्मान हादी की मौत ने बांग्लादेश को एक बार फिर हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथ की आग में झोंक दिया है। भारत विरोधी नारों, धार्मिक हिंसा और अल्पसंख्यकों पर हमलों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। आने वाले दिनों में बांग्लादेश की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।


