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‘हनुमानगढ़ी में नमाज़ हुई थी, सबूत मौजूद हैं’— स्वामी जितेन्द्रानंद का बड़ा दावा, अविमुक्तेश्वरानंद और बृजभूषण के बयान पर तीखा पलटवार

अयोध्या। हनुमानगढ़ी में वर्ष 2003 में नमाज़ पढ़े जाने को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने दावा किया है कि हनुमानगढ़ी परिसर में नमाज़ अदा किए जाने की घटना वास्तविक थी और इससे जुड़े न्यायालयीन अभिलेख तथा अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने उन बयानों का भी खंडन किया जिनमें कहा गया था कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज़ नहीं पढ़ी गई।

स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने एक साक्षात्कार में कहा कि वर्ष 2003 की घटना और उसके बाद हुई कानूनी कार्रवाई के पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। उनके अनुसार, इस पूरे प्रकरण को झूठा बताना तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों की अनदेखी करना है।

क्या है पूरा मामला?

स्वामी जितेन्द्रानंद के अनुसार, वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ी परिसर से जुड़े महंत ज्ञानदास के आश्रम क्षेत्र में नमाज़ अदा कराई गई थी। उनका दावा है कि उस समय नमाज़ियों के लिए दरी हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों तक बिछाई गई थी। इस घटना का संत समाज ने विरोध किया था और मामला न्यायालय तक पहुंचा।

उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय मंत्री एवं हनुमानगढ़ी के महंत गौरी शंकर दास समेत कई संत पक्षकार रहे हैं और उनके पास न्यायालय से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।

2005 में दोबारा प्रयास का भी दावा

स्वामी जितेन्द्रानंद ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2005 में दोबारा नमाज़ और रोज़ा इफ्तार कराने का प्रयास किया गया, जिसका संत समाज ने व्यापक विरोध किया।

उनके अनुसार, फैजाबाद जिला न्यायालय में इस मामले को लेकर वाद दायर किया गया था, जिसमें कई महंत पक्षकार बने। उन्होंने कहा कि न्यायालय की सुनवाई के दौरान महंत ज्ञानदास ने लिखित रूप से माफी मांगी थी और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होने का आश्वासन दिया था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार में नहीं की जा रही है।

ट्रस्ट डीड का भी किया उल्लेख

स्वामी जितेन्द्रानंद ने कहा कि हनुमानगढ़ी ट्रस्ट डीड की धारा 10 में परिसर के धार्मिक नियमों का उल्लेख है। उनके अनुसार, ट्रस्ट के नियमों में अन्य धर्म से संबंधित गतिविधियों को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी महंत द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है।

अविमुक्तेश्वरानंद और बृजभूषण के बयान पर प्रतिक्रिया

हाल के दिनों में कुछ सार्वजनिक बयानों में यह दावा किया गया था कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज़ नहीं पढ़ी गई। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वामी जितेन्द्रानंद ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेज, न्यायालयीन रिकॉर्ड और उस समय हुए विरोध प्रदर्शन इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हैं।

उन्होंने कहा कि इस विषय पर तथ्यों के बजाय भ्रामक जानकारी देना उचित नहीं है और इतिहास से जुड़े मामलों पर दस्तावेजों के आधार पर ही टिप्पणी की जानी चाहिए।

14 दिन तक चला था विरोध प्रदर्शन

स्वामी जितेन्द्रानंद का दावा है कि वर्ष 2005 में कथित तौर पर दोबारा नमाज़ और इफ्तार कार्यक्रम की कोशिश के विरोध में हनुमानगढ़ी के अधिकांश महंतों और नागा साधुओं ने लगभग 14 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया था।

उन्होंने यह भी कहा कि उस दौरान कई धार्मिक और सामाजिक हस्तियां आंदोलन में शामिल हुई थीं। उनके अनुसार, उस समय की घटनाओं का रिकॉर्ड स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के अभिलेखों में भी दर्ज है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

हनुमानगढ़ी से जुड़े इस विवाद को लेकर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। स्वामी जितेन्द्रानंद ने अपने दावों के समर्थन में न्यायालयीन दस्तावेज और रिकॉर्ड होने की बात कही है। वहीं, इस विषय पर संबंधित अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया और आधिकारिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।

News Desk

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