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PoK में अपनी ही जनता पर बरसीं गोलियां! रावलकोट में ड्रोन हमले और फायरिंग का आरोप, 3 की मौत से मचा हड़कंप

पाकिस्तान: अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में एक बार फिर तनावपूर्ण हालात सामने आए हैं। रावलकोट शहर में प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी और कथित ड्रोन हमलों की खबरों ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि गोलीबारी की घटना रावलकोट के उमर फारूक चौक के आसपास हुई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब पांच बजे से इलाके में फायरिंग शुरू हुई, जो कई घंटों तक जारी रही। इस दौरान कथित तौर पर ड्रोन के इस्तेमाल और रिहायशी इलाकों में विस्फोटक गिराए जाने की भी खबरें सामने आई हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

घरों में आग, सड़कों पर अफरा-तफरी

घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो और तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं। इनमें कुछ मकानों में आग लगी दिखाई देने और घटनास्थल पर मलबा तथा धातु के टुकड़े बिखरे होने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ आम नागरिकों के घर भी प्रभावित हुए।

कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि गोलीबारी के दौरान बच्चों और निहत्थे लोगों को भी निशाना बनाया गया। इन आरोपों की आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में घटना से जुड़े वीडियो और दावों को पूरी तरह प्रमाणित तथ्य मानने से पहले उनकी जांच जरूरी है।

तीन की मौत और 18 घायल होने की खबर

रावलकोट से सामने आ रही शुरुआती सूचनाओं में तीन लोगों की मौत और 18 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। घायलों की स्थिति, उनकी पहचान और उन्हें किन अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, इस बारे में फिलहाल विस्तृत और पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

घटना को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे भी सामने आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया। दूसरी ओर, पुलिस से जुड़ी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरक्षा बलों ने बस टर्मिनल के पास लगाए गए अवरोध हटाने और रास्ते खुलवाने के लिए अभियान चलाया था। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की, जिसके बाद जवाबी फायरिंग हुई।

इन परस्पर विरोधी दावों के बीच घटना की वास्तविक परिस्थितियों, गोलीबारी की शुरुआत किसने की और मौतों के सही आंकड़े क्या हैं—इन सभी सवालों का निष्पक्ष सत्यापन जरूरी है।

मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद होने की खबर

हिंसा के बाद रावलकोट में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की सूचना है। संचार व्यवस्था प्रभावित होने से स्थानीय लोगों को अपने परिवारों और परिचितों से संपर्क करने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा, घटनास्थल से सही और समय पर जानकारी जुटाना भी मुश्किल हो जाता है।

संचार सेवाओं पर पाबंदी या व्यवधान की स्थिति में अफवाहें तेजी से फैल सकती हैं। इसलिए इस दौरान किसी भी अपुष्ट वीडियो, मृतकों की संख्या या हमले से जुड़े दावों को बिना जांच साझा करने से बचना जरूरी है।

आखिर क्यों सड़कों पर उतर रहे हैं PoK के लोग?

रावलकोट में ताजा तनाव को समझने के लिए पिछले कई महीनों से जारी असंतोष पर भी नजर डालनी होगी। पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोगों और जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े प्रदर्शनकारियों की मांगें लंबे समय से चर्चा में हैं।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सस्ती बिजली, गेहूं और आटे की उचित कीमत, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाओं और प्राकृतिक संसाधनों की मौजूदगी के बावजूद स्थानीय आबादी को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।

विधानसभा में प्रतिनिधित्व को लेकर भी असंतोष जताया जा रहा है। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों की व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं। इसके अलावा, वे स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार देने और क्षेत्र के संसाधनों पर स्थानीय लोगों का नियंत्रण बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

अब आगे क्या होगा?

रावलकोट की ताजा घटना ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में पहले से जारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव को और बढ़ा दिया है। यदि गोलीबारी, नागरिकों को नुकसान पहुंचने और संचार सेवाएं बाधित होने के आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला मानवाधिकार और नागरिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

फिलहाल सबसे जरूरी है कि घायलों को उपचार मिले, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुलना भी जरूरी है, ताकि हालात और न बिगड़ें।

रावलकोट में तीन मौतों और 18 लोगों के घायल होने की खबर ने पूरे क्षेत्र का ध्यान खींचा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होना अहम होगा कि हिंसा किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन था।

News Desk

Written by News Desk

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