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CJP का बड़ा दांव! राकेश टिकैत से हुई अहम मुलाकात, क्या किसान-युवा आंदोलन मिलकर सरकार को देंगे नई चुनौती?

नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपने अभियान को व्यापक सामाजिक मुद्दों तक ले जाने की तैयारी में दिखाई दे रही है। इसी दिशा में पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं किसान नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की। इस बैठक को किसानों और युवाओं के मुद्दों को एक साझा मंच पर लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सीजेपी का कहना है कि शिक्षा, रोजगार और किसानों की समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए इन मुद्दों पर व्यापक जनसमर्थन जुटाने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों और किसान संगठनों से संवाद शुरू किया गया है। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से किसी संयुक्त आंदोलन की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

राकेश टिकैत से क्यों हुई मुलाकात?

जानकारी के अनुसार, सीजेपी के प्रतिनिधियों ने राकेश टिकैत से मुलाकात कर किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर समर्थन मांगा। पार्टी का कहना है कि हाल के छात्र आंदोलनों ने युवाओं की चिंताओं को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाया है और अब कृषि तथा रोजगार जैसे मुद्दों को भी उसी गंभीरता से उठाया जाना चाहिए।

बैठक में कथित तौर पर शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, किसानों की समस्याएं और युवाओं के भविष्य जैसे विषयों पर चर्चा हुई। हालांकि, बैठक के बाद किसी संयुक्त कार्यक्रम या आंदोलन की तारीख का ऐलान नहीं किया गया।

अभिजीत दीपके ने दी दोबारा आंदोलन की चेतावनी

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया गया और कथित उत्पीड़न जारी रहा, तो पार्टी फिर से बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगी।

उन्होंने कहा कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस कार्रवाई का सामना किया और यदि सरकार ने युवाओं की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो सीजेपी एक बार फिर देशभर में आंदोलन करने के लिए तैयार होगी।

पार्टी का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल छात्र हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, बेरोजगार युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी उठाना है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई बहस

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पेपर लीक विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। अदालत ने ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा करने की बात कही थी। साथ ही अदालत ने पहले से दर्ज मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति भी दी थी।

इसी संदर्भ में सीजेपी का आरोप है कि सरकार अदालत के आदेशों का हवाला देकर अपने पूर्व आश्वासनों को लागू करने से बच रही है।

सरकार पर वादा निभाने का दबाव

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार ने पहले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज न करने और पुराने मामलों पर राहत देने का भरोसा दिया था। उनका आरोप है कि अब सरकार यह कह रही है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण वह कोई निर्णय नहीं ले सकती।

सौरव दास के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ऐसा कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है जो सरकार को एफआईआर वापस लेने से रोकता हो। उनका कहना है कि यदि सरकार चाहे तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित निर्णय ले सकती है।

क्या बनेगा किसान-युवा साझा मंच?

सीजेपी और भारतीय किसान यूनियन के बीच हुई इस मुलाकात के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में दोनों संगठन किसी साझा मुद्दे पर साथ आते हैं, तो इसका असर राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिल सकता है।

हालांकि अभी तक भारतीय किसान यूनियन की ओर से किसी संयुक्त आंदोलन या औपचारिक समर्थन की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इस बैठक को फिलहाल संवाद और संभावित सहयोग की दिशा में उठाया गया शुरुआती कदम माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार छात्रों से जुड़े मामलों पर क्या रुख अपनाती है और सीजेपी अपनी अगली रणनीति क्या तय करती है। यदि संगठन अपने घोषित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ता है और किसान संगठनों का समर्थन भी मिलता है, तो आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में बड़े स्तर पर आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल सभी पक्षों की ओर से आगे की औपचारिक घोषणाओं का इंतजार किया जा रहा है।

News Desk

Written by News Desk

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