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किश्तवाड़ बादल फटने की त्रासदी: अब तक 60 की मौत, 120 घायल; पीएम मोदी ने सीएम उमर अब्दुल्ला से ली स्थिति की जानकारी

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के चिशोती कस्बे में चार जगह बादल फटने से भारी तबाही, मृतकों में तीर्थयात्री और CISF जवान भी शामिल, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन का बचाव अभियान जारी

किश्तवाड़ (जम्मू-कश्मीर)। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चिशोती कस्बे में बृहस्पतिवार को चार जगह बादल फटने की भीषण घटना में अब तक 60 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 120 से अधिक लोग घायल हैं। मृतकों में बड़ी संख्या में मचैल माता के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु और CISF के दो जवान शामिल हैं। बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और कई तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।


एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन का संयुक्त बचाव अभियान

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की दो टीमें, केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर, मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटी हैं। एनडीआरएफ अधिकारी के मुताबिक, “बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इलाके में पहुंचना कठिन है और हमारे पास सिर्फ एक जेसीबी है। मलबा हटाकर दबे लोगों को निकालने का काम जारी है। आशंका है कि अब भी 100-200 लोग मलबे में दबे हो सकते हैं।”


पीएम मोदी ने लिया घटना का संज्ञान

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घटना की पूरी जानकारी दी। सीएम अब्दुल्ला ने ट्वीट कर बताया, “अभी-अभी प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया। मैंने उन्हें किश्तवाड़ की स्थिति और प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में अवगत कराया। मेरी सरकार केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की गई सहायता और प्रभावित लोगों के समर्थन के लिए आभारी है।”


प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई भयावह घटना की दास्तान

एक पीड़ित ने बताया, “हम वहीं थे, अचानक धमाके जैसी आवाज आई और फिर कुछ ही मिनटों में 4 फीट मलबा आ गया। हम 11 लोग थे, जिनमें से ज्यादातर सुरक्षित निकल आए, लेकिन मेरी बेटी और पत्नी मलबे में फंस गई थीं। अब उनकी हालत स्थिर है।”


मचैल माता यात्रा में श्रद्धालु भी बने शिकार

बादल फटने की इस त्रासदी में अधिकतर मृतक मचैल माता यात्रा में शामिल श्रद्धालु थे, जो इस समय किश्तवाड़ में डेरा डाले हुए थे। हादसे के बाद से इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।


स्थानीय लोगों में रोष और चिंता

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इस इलाके में पिछले कुछ वर्षों में बारिश और भू-स्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।


???? निष्कर्ष:
किश्तवाड़ का यह बादल फटना जम्मू-कश्मीर के हालिया इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। प्रशासन और एनडीआरएफ पूरी ताकत से राहत-बचाव में जुटे हैं, लेकिन मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

News Desk

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