दिल्ली। SSC (Staff Selection Commission) के CGL (Combined Graduate Level) एग्जाम में तकनीकी गड़बड़ियों और प्रशासनिक खामियों के चलते छात्रों का संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। 12 सितंबर से आयोजित हो रहे एग्जाम में गुरुग्राम, दिल्ली, मुंबई, जम्मू, झारखंड समेत 9 प्रमुख सेंटर पर तीन दिनों के भीतर एग्जाम कैंसिल कर दिया गया। स्टूडेंट्स ने जोरदार प्रदर्शन किया और सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा की।
🎯 केंद्रों पर आई तकनीकी समस्याएं
गुरुग्राम के एमएम पब्लिक स्कूल सेंटर में पहली शिफ्ट से ही सर्वर डाउन रहने की शिकायतें सामने आईं। स्टूडेंट प्रभात कुमार ने बताया कि उन्हें बिना कोई पूर्व सूचना दिए एग्जाम सेंटर पर पहुंचने पर दरवाजा बंद मिला। अनिश्चिता की इस स्थिति ने सभी को मानसिक रूप से तोड़ दिया। दिव्या पाल, जो कानपुर के आरसीआरडी कन्या महाविद्यालय सेंटर में शामिल थीं, भी सर्वर डाउन के कारण एग्जाम से वंचित रहीं। 25 स्टूडेंट्स को वहां बैठने तक नहीं दिया गया। कई बार बेहोशी जैसी स्थिति भी पैदा हुई।
📌 SSC की आधिकारिक प्रतिक्रिया
SSC चेयरपर्सन एस गोपाल कृष्णन ने कहा कि कुछ सेंटर्स पर प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी समस्याओं के कारण एग्जाम कैंसिल किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित उम्मीदवारों के लिए अगले 10 दिनों में नए सेंटर पर एग्जाम करवाए जाएंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अगर आवश्यक हुआ तो एजेंसी एडुक्विटी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। SSC के मुताबिक कुल 227 सेंटर पर एग्जाम आयोजित किए जा रहे थे, जिनमें से 215 सफलतापूर्वक सम्पन्न हुए।
📊 एडुक्विटी एजेंसी पर उठते सवाल
SSC द्वारा एडुक्विटी को टेंडर देने के निर्णय को लेकर भी विवाद गहराया है। तकनीकी तौर पर कमजोर माने जाने वाली एजेंसी ने न्यूनतम बोली लगाकर यह ठेका हासिल किया था। SSC के नियमों के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी मूल्यांकन 70% और लागत मूल्यांकन 30% वेटेज पर आधारित होता है। SSC का दावा है कि तकनीकी गड़बड़ियों को सुधारने के निर्देश एजेंसी को दे दिए गए हैं। वहीं स्टूडेंट्स का कहना है कि यह पहले भी गड़बड़ियां हो चुकी हैं, फिर भी एजेंसी को टेंडर क्यों दिया गया?
📢 छात्रों की मांगें और उनके आक्रोश
छात्रों का कहना है कि एग्जाम की तैयारी में सालों की मेहनत और आर्थिक खर्च लगा होता है। समय पर एडमिट कार्ड नहीं आना, सेंटर में बदलाव के कारण अनिश्चितता, सर्वर डाउन की समस्या और पर्याप्त सूचना न देना इन सबने स्टूडेंट्स को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित किया है। दिव्या पाल और प्रभात कुमार जैसे उम्मीदवार SSC के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने SSC चेयरपर्सन से अपील की कि छात्र हित में निर्णय लिए जाएं ताकि उनका साल बर्बाद न हो।
📈 आगे की कार्यवाही
SSC ने आश्वासन दिया है कि समस्याग्रस्त सेंटर को बंद किया जाएगा और नए सेंटर्स पर एग्जाम करवाया जाएगा। इसके साथ ही तकनीकी आधार पर एजेंसी एडुक्विटी को जरूरी सुधार करने को कहा गया है। अगर सुधार नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई का ऐलान भी किया गया है। फिर भी छात्रों की चिंता बनी हुई है कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां न दोहराई जाएं।


