नई दिल्ली। देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आज यानी 28 अक्टूबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह अभियान 7 फरवरी 2025 तक चलेगा। इस दौरान चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करेगा, नए मतदाताओं के नाम जोड़ेगा और मृत या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “आज रात से इन सभी राज्यों की वोटर लिस्ट फ्रीज हो जाएगी और संशोधन की प्रक्रिया शुरू होगी।”
📍 इन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा SIR
- अंडमान निकोबार
- छत्तीसगढ़
- गोवा
- गुजरात
- केरल
- लक्षद्वीप
- मध्य प्रदेश
- पुडुचेरी
- राजस्थान
- तमिलनाडु
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
खास बात यह है कि अगले साल चुनाव वाले पश्चिम बंगाल में SIR होगा, लेकिन असम में नहीं। चुनाव आयोग का कहना है कि असम में नागरिकता से जुड़े नियम अलग हैं, इसलिए वहां यह प्रक्रिया अन्य तरीके से होगी।
📘 SIR से जुड़े 7 प्रमुख सवाल-जवाब
1️⃣ SIR क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन — चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट करने की वार्षिक प्रक्रिया। इसमें 18 वर्ष से अधिक आयु के नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है, मृतक या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाए जाते हैं और सूची की गलतियों को सुधारा जाता है।
2️⃣ पहले कहां हुआ?
पहला चरण बिहार में पूरा हो चुका है। बिहार की फाइनल वोटर लिस्ट में 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जो नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालेंगे।
3️⃣ कौन करेगा यह काम?
इन 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ मतदाता हैं। इनके लिए लगभग 5.33 लाख बीएलओ (BLO) और 7 लाख बीएलए (BLA) राजनीतिक दलों की ओर से लगाए जाएंगे।
4️⃣ वोटर को क्या करना होगा?
बीएलओ मतदाता के घर जाकर फॉर्म देंगे। मतदाता को अपनी जानकारी चेक करनी होगी। अगर नाम दो जगह है तो एक जगह से कटवाना होगा, और अगर नाम नहीं है तो नया फॉर्म भरकर जरूरी दस्तावेज देने होंगे।
5️⃣ मान्य दस्तावेज
- आधार कार्ड (पहचान के लिए)
- पासपोर्ट
- जन्म प्रमाणपत्र
- 10वीं की मार्कशीट
- पेंशनर पहचान पत्र
- निवास प्रमाणपत्र
- जाति प्रमाणपत्र
- परिवार रजिस्टर या जमीन आवंटन पत्र
6️⃣ अगर नाम कट गया तो क्या करें?
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद एक महीने तक अपील का मौका मिलेगा। अपील ईआरओ → डीएम → सीईओ स्तर तक की जा सकती है।
7️⃣ शिकायत या जानकारी कहां से लें?
चुनाव आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें या नजदीकी जिला चुनाव कार्यालय से संपर्क करें।
⚖️ आधार कार्ड की स्थिति स्पष्ट
चुनाव आयोग ने कहा है कि आधार कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा, लेकिन नागरिकता प्रमाण के रूप में नहीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह नियम सितंबर में लागू किया गया।
🧾 SIR का उद्देश्य
1951 से 2004 तक नियमित रूप से मतदाता सूची संशोधन होते रहे, लेकिन पिछले 21 वर्षों में कई राज्यों में यह प्रक्रिया अधूरी रह गई। अब इसका उद्देश्य है —
- योग्य मतदाता सूची से न छूटें
- मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना
- विदेशी नागरिकों के नाम सूची से निकालना
- डुप्लीकेट एंट्री खत्म करना


