लखनऊ: की मोहनलालगंज तहसील में शनिवार को आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाला समाधान दिवस, उस समय पूरी तरह अव्यवस्था का शिकार हो गया जब अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते समाधान दिवस “समस्या दिवस” में तब्दील हो गया।
तहसील परिसर में बड़ी संख्या में एकत्र हुए वकीलों ने SDM और तहसीलदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि तहसील में दलाल पूरी तरह सक्रिय हैं और उन्हें अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। वकीलों ने नारे लगाए—
“SDM तेरी तानाशाही नहीं चलेगी”,
“तहसीलदार मुर्दाबाद”।
अधिकारियों की देरी से भड़का गुस्सा
जानकारी के मुताबिक, समाधान दिवस सुबह तय समय पर शुरू होना था, लेकिन प्रभारी एडीएम, पुलिस और कई विभागीय अधिकारी सुबह 11:40 बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे। फरियादी और आमजन घंटों इंतजार करते रहे, जिससे नाराजगी बढ़ती चली गई।
इसी दौरान अधिवक्ताओं का एक बड़ा समूह समाधान दिवस के आयोजन स्थल पर पहुंचा और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कुछ ही देर में नारेबाजी तेज हो गई और माहौल तनावपूर्ण बन गया।
आमजन और किसान संगठनों का भी समर्थन
वकीलों के हंगामे के दौरान आम नागरिक और किसान संगठनों के लोग भी उनके समर्थन में खड़े हो गए। तहसील परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे प्रशासन को स्थिति संभालने में मशक्कत करनी पड़ी।
वकीलों की 5 प्रमुख मांगें, दलालों को हटाने पर जोर
मोहनलालगंज बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कौशलेंद्र शुक्ला ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि—
- अधिवक्ताओं की सहमति के बिना सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में उपनिबंधक कार्यालय खोल दिया गया, जिससे आमजन को भारी परेशानी हो रही है।
- तहसील न्यायालयों के आदेशों का समय पर पालन नहीं किया जाता।
- बहस पूरी होने के बाद भी महीनों तक आदेश सुरक्षित रखे जाते हैं।
- अविवादित वरासत के मामलों की फाइलें लंबे समय तक लटकी रहती हैं।
- लेखपाल समय पर रिपोर्ट नहीं देते और कई बार अधिवक्ताओं से दुर्व्यवहार व मारपीट तक की घटनाएं सामने आई हैं।
उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि SDM मोहनलालगंज दलालों के माध्यम से पत्रावलियों का निस्तारण कराते हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अधिवक्ताओं की सबसे बड़ी मांग रही कि तहसील से दलालों को तत्काल बाहर किया जाए।
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर तहसील स्तर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद समाधान दिवस में अधिकारियों की गैरहाजिरी और जनता की समस्याओं को गंभीरता से न लेने के आरोपों ने शासन-प्रशासन की छवि को झटका दिया है।
मोहनलालगंज तहसील में समाधान दिवस के दौरान हुआ यह हंगामा केवल वकीलों का आक्रोश नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और कथित भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ गुस्से की अभिव्यक्ति है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह आंदोलन आगे और बड़ा रूप ले सकता है।


