लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को मंगलवार को बिजलीकर्मियों के विरोध प्रदर्शन का तीखा सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मंत्री को अपने लखनऊ स्थित आवास में ढाई घंटे तक कैद रहना पड़ा। इसके बाद उन्होंने पुलिस बल के घेरे में हाथ जोड़े हुए बाहर आकर प्रदर्शनकारियों से शांति की अपील की।
यह विरोध उस घटना के बाद और उग्र हो गया जब मुरादाबाद में बिजली गुल होने पर एके शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान चीफ इंजीनियर सहित पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इससे नाराज बिजलीकर्मियों ने राज्यभर में प्रदर्शन तेज कर दिया है।
प्रदर्शन में लगे ‘इस्तीफा दो’ के नारे
लखनऊ स्थित मंत्री आवास के बाहर इकट्ठा हुए सैकड़ों बिजलीकर्मियों ने “AK शर्मा इस्तीफा दो” के नारे लगाए। प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के निजीकरण और अधिकारियों के मनमाने निलंबन के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, एके शर्मा आवास के भीतर मौजूद थे, जबकि बाहर प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी और तख्तियां लहराकर विरोध दर्ज किया। इसके चलते पुलिस को मौके पर बड़ी संख्या में तैनात करना पड़ा।
पुलिस की सुरक्षा में निकले मंत्री
करीब ढाई घंटे तक अंदर रहने के बाद, ऊर्जा मंत्री पुलिस बल के साथ बाहर निकले और हाथ जोड़कर प्रदर्शनकारियों से बात की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और बातचीत के लिए तैयार रहने की अपील की। हालांकि, प्रदर्शनकारी मंत्री की बातों से संतुष्ट नहीं दिखे और विरोध जारी रहा।
बिजली विभाग में उबाल, आंदोलन की चेतावनी
बिजली कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द निलंबित इंजीनियरों की बहाली और निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई, तो राज्यव्यापी हड़ताल की जा सकती है।
प्रदेश भर में बढ़ते असंतोष और अस्थिरता के बीच, सरकार के लिए यह मुद्दा एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
निष्कर्ष:
बिजली विभाग में उपजे इस असंतोष ने शासन-प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहराता जा सकता है।


