आज: देशभर में अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक पर्व करवा चौथ बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखकर अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगल कामना करती हैं।
इस वर्ष का करवा चौथ विशेष है क्योंकि इस दिन सिद्धि योग और शिववास योग जैसे दो शुभ संयोग बन रहे हैं, जो व्रत के फल को कई गुना बढ़ाने वाले माने जाते हैं। इन योगों में व्रत रखने से सौभाग्य, समृद्धि और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
क्या कुंवारी कन्याएं रख सकती हैं करवा चौथ का व्रत?
करवा चौथ केवल विवाहित महिलाओं का ही नहीं, बल्कि अविवाहित कन्याओं के लिए भी शुभ पर्व माना गया है।
कुंवारी लड़कियां यह व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने और उज्जवल भविष्य की कामना से रखती हैं। वे भगवान शिव-पार्वती या भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करती हैं ताकि उन्हें शुभ विवाह, सौभाग्य और स्थिर जीवन प्राप्त हो सके।
आस्था और श्रद्धा से किया गया यह व्रत कन्याओं के जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और शुभ परिणाम लाने वाला माना गया है।
करवा और सींक का धार्मिक महत्व
करवा चौथ की पूजा में उपयोग किया जाने वाला पात्र ‘करवा’ (पीतल या मिट्टी का बर्तन) अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें एक टोटी (नलिका) लगी होती है, जो ऊर्जा का प्रतीक है।
पूजन के समय इस टोटी में कांस की सींक लगाई जाती है, जो शक्ति, स्थिरता और जीवन ऊर्जा का प्रतीक है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, करवा का संबंध भगवान गणेश से जोड़ा गया है — जो विघ्नहर्ता और मंगलदाता माने जाते हैं। इसी कारण करवा और सींक दोनों ही शुभता, पवित्रता और सौभाग्य के प्रतीक माने जाते हैं।
व्रत का संकल्प विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीप जलाएं।
फूल और अक्षत लेकर मन में संकल्प करें कि —
“मैं आज करवा चौथ का व्रत अपने पति (या मनोवांछित वर) की दीर्घायु और मंगल के लिए पूरे नियमपूर्वक रखूंगी, और चंद्र दर्शन के बाद अर्घ्य देकर व्रत पूरा करूंगी।”
इसके बाद फूल और अक्षत भगवान को अर्पित करें और दिनभर व्रत का पालन श्रद्धापूर्वक करें।
शाम को करवा माता की कथा सुनें और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।
पर्व का भावार्थ
करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक पर्व है। यह स्त्री की शक्ति, सहनशीलता और परिवार के प्रति अटूट आस्था को दर्शाता है।
व्रत के साथ महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार करती हैं — मेहंदी, लाल साड़ी, चूड़ियां, बिंदी और मांगटीका पहनकर माँ करवा और चंद्र देव की आराधना करती हैं।
“करवा रानी करवा ले, सुघड़ सुहागन करवा ले, बना रहे अमर सुहाग हमारा, माँ करवा का आशीष रहे।”
🌕💫 करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं!


