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यूपी में नकली पनीर का कारोबार: यूरिया, डिटर्जेंट और टिनोपाल से बनाया जा रहा ‘चमकदार जहर’

त्योहारों के सीजन में पूरे उत्तर प्रदेश में नकली पनीर का कारोबार जोरों पर है। यूरिया, डिटर्जेंट और टिनोपाल जैसे रसायनों से बनाए जा रहे इस पनीर से सेहत पर गहरा खतरा मंडरा रहा है। एफएसडीए ने राजस्थान से आए कारीगरों की धरपकड़ तेज कर दी है।

लखनऊ। त्योहारों के सीजन में जहां बाजारों में मिठाइयों और पनीर की मांग बढ़ जाती है, वहीं उत्तर प्रदेश में नकली पनीर का कारोबार भी अपने चरम पर पहुंच गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) ने खुलासा किया है कि प्रदेश के कई जिलों में यूरिया, डिटर्जेंट, पाम ऑयल और टिनोपाल मिलाकर नकली पनीर तैयार किया जा रहा है।

यूरिया और डिटर्जेंट से बन रहा है नकली पनीर

एफएसडीए के अधिकारियों ने बताया कि मिलावटी पनीर में दूध की जगह सिंथेटिक रसायन मिलाए जा रहे हैं। इसमें यूरिया, डिटर्जेंट और पाम ऑयल का उपयोग किया जा रहा है। पनीर की बनावट और रंग को ‘चमकदार’ बनाने के लिए टिनोपाल और आला जैसे औद्योगिक केमिकल मिलाए जा रहे हैं, जो कपड़ों की धुलाई में उपयोग होते हैं।

टिनोपाल एक ऑप्टिकल ब्राइटनिंग एजेंट है, जो वस्त्रों को सफेद और चमकदार दिखाने के लिए बनाया जाता है। ऐसे में जब इसे खाद्य उत्पादों में मिलाया जाता है, तो यह शरीर के लिए विषाक्त (टॉक्सिक) हो जाता है।


जांच अभियान में उजागर हुए चौंकाने वाले तथ्य

एफएसडीए ने 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी जांच अभियान शुरू किया है, जो 17 अक्टूबर तक चलेगा।
अब तक लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की नकली पनीर, खोवा और मिठाइयां नष्ट की जा चुकी हैं।

नोएडा, मेरठ, आगरा, कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, बरेली, और गोरखपुर जैसे जिलों में जांच के दौरान भारी मात्रा में मिलावटी पनीर पकड़ा गया है।

संयुक्त आयुक्त (खाद्य) हरिशंकर सिंह ने बताया कि नकली पनीर बनाने वाले बाहर से आए कारीगरों को पकड़ना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि वे रात में पनीर तैयार कर सुबह मंडियों में बेचकर फरार हो जाते हैं।


राजस्थान से आया ‘टिनोपाल ट्रेंड’

अधिकारियों के अनुसार, इस बार नकली पनीर को चमकदार बनाने के लिए टिनोपाल और आला का इस्तेमाल पहली बार बड़े पैमाने पर देखा गया है। यह तरीका राजस्थान के अलवर और आसपास के जिलों से आए कारीगर लेकर आए हैं।

वजन बढ़ाने के लिए वे खड़िया मिट्टी तक मिलाने से नहीं हिचकते।
राजस्थान सीमा से सटे जिलों में अब एफएसडीए और पुलिस की संयुक्त टीमें चौकसी बढ़ा रही हैं।


क्या कहते हैं डॉक्टर और विशेषज्ञ

केजीएमयू के गैस्ट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. सुमित रूंगटा के अनुसार,

“यह पनीर शरीर के लिए धीमे जहर का काम करता है। यूरिया, डिटर्जेंट, टिनोपाल और आला जैसे रसायन आंतों से होते हुए खून में पहुंच जाते हैं। इससे लिवर और किडनी पर भारी दबाव पड़ता है और फेल होने का खतरा रहता है। लंबे समय में यह कैंसर, हार्ट डिजीज और पाचन तंत्र की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।”

शुरुआती लक्षणों में पेट दर्द, अपच, एलर्जी, उल्टी-दस्त और थकान शामिल हैं।


कैसे पहचानें असली और नकली पनीर

संयुक्त आयुक्त (खाद्य) हरिशंकर सिंह के अनुसार –

  • असली पनीर मुलायम होता है, दूध जैसी महक देता है और पानी में तैरता है।

  • नकली पनीर सख्त, रबड़ जैसा और रासायनिक गंध वाला होता है।

  • इसे गर्म पानी में डालने पर यह घुलने या टूटने लगता है।

  • आयोडीन टिंचर की कुछ बूंदें डालने पर असली पनीर का रंग नहीं बदलता, जबकि नकली पनीर नीला या काला हो जाता है।


एफएसडीए का अलर्ट और अपील

आयुक्त डा. रोशन जैकब ने कहा –

“मिलावट का कारोबार रोकने के लिए अभियान तेज किया गया है। सप्ताहभर में भारी मात्रा में पनीर और मिठाइयां नष्ट कराई गई हैं। फिर भी अगर किसी को मिलावटी उत्पाद या नकली पनीर बनाने की जानकारी मिले, तो विभाग को तुरंत सूचित करें।”

जनता वाट्सएप नंबर 9793429747 पर जानकारी भेज सकती है। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

News Desk

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