मुजफ्फरपुर | बिहार की राजनीति में इस वक्त बड़ा मामला सामने आया है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ छठ पर्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अदालत में परिवाद दायर किया गया है।
यह परिवाद मुजफ्फरपुर जिले की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा द्वारा दर्ज कराया गया है। अदालत ने मामले को स्वीकार करते हुए 11 नवंबर 2025 को सुनवाई की तिथि तय की है।
⚖️ क्या है मामला — छठ पर्व और पीएम मोदी पर टिप्पणी का आरोप
अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मुजफ्फरपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए छठ पर्व, जो कि हिंदू आस्था से जुड़ा प्रमुख पर्व है, उसके संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी अमर्यादित बयान दिया, जिससे आम जनता और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची।
ओझा ने कहा —
“छठ बिहार और उत्तर भारत की धार्मिक पहचान है। इस पर अनुचित टिप्पणी और प्रधानमंत्री पर अपमानजनक शब्द कहना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं। इसलिए हमने न्यायालय की शरण ली है।”
📜 कौन-कौन सी धाराओं में मामला दर्ज हुआ
अधिवक्ता ओझा ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की निम्नलिखित धाराओं के तहत परिवाद दायर किया है —
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धारा 298: किसी धर्म या आस्था की भावना को जानबूझकर आहत करना
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धारा 352: किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य
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धारा 353: सार्वजनिक व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक बयान
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धारा 356(2): लोकशांति भंग करने योग्य बयानबाजी
अदालत ने इन धाराओं को ध्यान में रखते हुए मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।
🗓️ 11 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने मामले पर सुनवाई की अगली तिथि 11 नवंबर 2025 तय की है।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) ने निर्देश दिया है कि उस दिन शिकायतकर्ता और उनके गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
📣 बिहार चुनावी मंच से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, यह मामला उस वक्त का है जब राहुल गांधी ने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मुजफ्फरपुर में एक जनसभा को संबोधित किया था।
अपने भाषण में उन्होंने छठ पर्व को लेकर टिप्पणी की थी, जिसे हिंदू समाज के कई वर्गों ने आपत्तिजनक माना था।
इसके बाद सोशल मीडिया पर भी यह बयान विवाद का विषय बना और कई संगठनों ने राहुल गांधी के खिलाफ कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी।
🗣️ अधिवक्ता ओझा का बयान — “आस्था के पर्व का अपमान बर्दाश्त नहीं”
परिवाद दायर करने वाले अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने कहा —
“छठ सिर्फ पर्व नहीं, आस्था का प्रतीक है। यह वह परंपरा है जो प्रकृति, नारी और सूर्य की आराधना से जुड़ी है। किसी भी व्यक्ति को इस पर अनुचित टिप्पणी करने का अधिकार नहीं। हमने कानून के दायरे में रहते हुए न्याय की मांग की है।”
📌 राजनीतिक हलकों में हलचल
जैसे ही मामला अदालत में दर्ज हुआ, राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी की टिप्पणी को “हिंदू विरोधी मानसिकता” बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बयान को गलत अर्थों में प्रस्तुत किया जा रहा है।


