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लखनऊ में ‘सनातन एकता’ का संदेश: संत सम्मेलन में धर्म रक्षा की गुहार, बोले- हिंदुओं को एकजुट करना होगा

राष्ट्र हिंदू रक्षा परिषद के विराट संत सम्मेलन में संतों और कवियों ने दिया संदेश — “अब समय है धर्म, संस्कृति और गौरव की रक्षा के लिए एकजुट होने का।”

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में रविवार को राष्ट्र हिंदू रक्षा परिषद द्वारा आयोजित विराट संत सम्मेलन और काव्य गोष्ठी में सनातन धर्म की एकता और धर्म रक्षा का संदेश दिया गया।
देशभर से आए संतों, महात्माओं और कवियों ने एक स्वर में कहा —

“अब समय आ गया है कि सभी सनातनी एक मंच पर आकर धर्म, संस्कृति और गौरव की रक्षा के लिए आगे आएं।”


🕉️ धर्म पर प्रहारों के खिलाफ आवाज

परिषद के राष्ट्रीय महासचिव मुकेश दुबे ने कहा कि आज सनातन धर्म, उसकी परंपराओं और मूल्यों पर लगातार प्रहार हो रहा है।
उन्होंने कहा —

“प्रलोभन और भय के सहारे धर्मांतरण कराया जा रहा है। ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाएं समाज को खोखला कर रही हैं। जब तक हिंदू समाज एकजुट नहीं होता, यह संघर्ष जारी रहेगा।”

उन्होंने बताया कि परिषद समरसता लाने, कुप्रथाओं को समाप्त करने और बौद्धिक विकास के लिए समाज में जनजागरण अभियान चला रही है।


⚖️ एक देश, एक कानून की मांग

कार्यक्रम के दौरान परिषद ने अपने प्रमुख उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इनमें शामिल थे —

  • गौ हत्या पर कठोर दंड का प्रावधान

  • भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग

  • धर्मांतरण और लव जिहाद पर रोक

  • गोवंश को राष्ट्र माता घोषित करने की पहल

  • एक देश, एक कानून लागू करने की मांग

  • जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने का प्रस्ताव

  • गुरुकुल और चेतना केंद्रों की स्थापना

  • स्वाभिमान एक्ट लागू करने की पहल

इन प्रस्तावों पर उपस्थित संतों और प्रतिनिधियों ने एकमत से समर्थन जताया।


🕯️ “सनातनी समाज को एक मंच पर आना होगा”

सम्मेलन में उपस्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा —

“समय आ गया है जब सनातनी समाज को एक मंच पर आकर अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए।”

मुख्य अतिथि पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अशोक द्विवेदी ने संस्कृत श्लोकों और रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से जन-जागरण का संदेश दिया।


🪔 कवियों की ओजस्वी रचनाओं से गूंजा सभागार

काव्य गोष्ठी में कवियों ने सनातन संस्कृति, धर्म रक्षा और भारत की एकता पर आधारित ओजस्वी कविताएँ प्रस्तुत कीं।
सभागार “जय श्रीराम” और “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा।

मुख्य संतों में अंतर्राष्ट्रीय महामंडलेश्वर इंद्रेश कौशिक, मनीष दास महाराज, आत्माराम तिवारी महाराज, विवेक टंगड़ी महाराज, रसिका साध्वी उमा जी सहित अनेक संतों ने धर्म जागरण पर अपने विचार रखे।


📿 धर्म जागरण अभियान का संकल्प

कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि राष्ट्र हिंदू रक्षा परिषद पूरे देश में सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए जन-जागरण अभियान चलाएगी।
संतों ने आह्वान किया कि युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए गांव-गांव में धर्म सभाओं और चेतना शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

News Desk

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