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न्याय व्यवस्था को मानवीय बनाने की जरूरत: लखनऊ में भावी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत बोले- विधिक संस्थाओं को जनसुलभ बनाना होगा

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत बोले — “हर महिला को यह विश्वास होना चाहिए कि न्याय व्यवस्था उसके साथ है”; ‘न्याय मार्ग’ एआई चैटबॉट और “स्पंदन” सभागार का किया उद्घाटन।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में “कानूनी सहायता के माध्यम से प्रजनन स्वायत्तता में बाधाओं को दूर करना” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन हुआ।
इसका उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया। इस अवसर पर न्यायाधीशों, विशेषज्ञों और अधिकारियों ने महिला अधिकारों, न्याय तक पहुंच, और डिजिटल सशक्तिकरण पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का आयोजन न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (JTRI) और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।


🕯️ “हर महिला को विश्वास होना चाहिए कि न्याय उसके साथ है”

उद्घाटन सत्र में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा —

“भारत के संविधान का अनुच्छेद 39(A) राज्य को यह दायित्व देता है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करे, चाहे उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।”

उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था को मानवीय और संवेदनशील बनाना आज की आवश्यकता है।
साथ ही, उन्होंने ‘न्याय मार्ग’ नामक एआई चैटबॉट का शुभारंभ किया, जो नागरिकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विधिक सहायता उपलब्ध कराएगा।


📜 “न्याय केवल निर्णयों में नहीं, संवेदनाओं में भी निहित है”

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा —

“किसी समाज की प्रगति उसकी महिलाओं की स्थिति से मापी जाती है।”
उन्होंने महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता को संरक्षित करने के लिए नीति-निर्माताओं और न्यायपालिका के सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने ‘न्याय मार्ग’ चैटबॉट को “न्याय तक पहुंच का मील का पत्थर” बताया।
वहीं न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा —

“बलात्कार पीड़िताओं को न केवल शारीरिक हिंसा बल्कि सामाजिक कलंक से भी लड़ना पड़ता है। इसलिए न्याय में संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”


⚖️ तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने रखे विचार

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अजय भानोट, अध्यक्ष — उच्च न्यायालय किशोर न्याय समिति ने की।
इस सत्र में NIMHANS, NHM, AALI और वात्सल्या संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि कानूनी सहयोग और चिकित्सीय सहायता के समन्वय से महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता को सशक्त किया जा सकता है।


🏛️ “स्पंदन” सभागार का उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने UPSLSA के नवनिर्मित “स्पंदन” सभागार का लोकार्पण भी किया।
यह सभागार आधुनिक तकनीक से सुसज्जित है और विधिक प्रशिक्षण, सम्मेलन और जन-जागरूकता अभियानों के लिए विकसित किया गया है।

कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. मनु कालिया, सदस्य सचिव, UPSLSA ने
सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और न्यायपालिका में तकनीकी उपयोग की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को रेखांकित किया।

News Desk

Written by News Desk

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