लुधियाना, 20 अक्टूबर 2026: पंजाब में नशे के कारोबार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को लुधियाना पहुंचे, जहां उन्होंने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों से हजारों करोड़ रुपये की कीमत की ड्रग्स जब्त की गई हैं, तो आखिर नशीले पदार्थ पंजाब के गांवों और शहरों तक पहुंचकर छोटी-छोटी पुड़ियों में कैसे बिक रहे हैं? शाह ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा और राज्य में नशा तस्करी पर रोक लगाने को लेकर भी सवाल खड़े किए।
अमित शाह का यह दौरा केवल दशहरा समारोह तक सीमित नहीं रहा। लुधियाना पहुंचने से पहले उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में नशे से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से मुलाकात की। इन मुलाकातों के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई और दोषियों को कानून के दायरे में लाने का भरोसा दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब में नशे के कारोबार, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है।
20 हजार करोड़ रुपये की ड्रग्स का जिक्र कर क्या बोले अमित शाह?
लुधियाना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों से करीब 20 हजार करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की जा चुकी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़े जाने के बावजूद वे पंजाब में स्थानीय स्तर पर कैसे पहुंच रहे हैं।
शाह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सवाल किया कि युवाओं तक नशीले पदार्थों की पहुंच रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उनका आरोप था कि पंजाब में नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रहा है और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग भी सुरक्षित नहीं हैं।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि 20 हजार करोड़ रुपये की जब्ती का आंकड़ा गृह मंत्री के बयान के संदर्भ में है। इसे पंजाब में जब्त की गई ड्रग्स की कुल कीमत नहीं समझा जाना चाहिए।

तीन परिवारों से मुलाकात, नशे के मुद्दे पर जताई चिंता
अमित शाह ने अपने पंजाब दौरे के दौरान तीन परिवारों से मुलाकात की। इनमें गुरदासपुर जिले के बिक्रमजीत सिंह, संगरूर के गुलजार सिंह और मानसा के परविंदर सिंह झोटा के परिवार शामिल थे।
बिक्रमजीत सिंह की 15 अक्टूबर को हत्या कर दी गई थी। स्थानीय लोगों और परिवार से जुड़े आरोपों के अनुसार, वह अपने क्षेत्र में नशा तस्करी का विरोध कर रहे थे। हालांकि, पुलिस ने इस मामले को दो समूहों के बीच मोबाइल फोन को लेकर हुए विवाद से भी जोड़ा था। इसलिए हत्या के पीछे की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
संगरूर के गुलजार सिंह की मौत ने भी विवाद खड़ा किया। उनके परिवार ने आरोप लगाया कि इलाके में नशे की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाने के बाद उन्हें परेशान किया गया था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष अलग विषय हैं।
तीसरा मामला मानसा के नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या से जुड़ा है। इन घटनाओं ने पंजाब में नशे के कारोबार के खिलाफ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपने पर भी चर्चा
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में पंजाब सरकार ने 20 अक्टूबर को जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपने की घोषणा की। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और परिवार की मांग के अनुसार मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को दी जा रही है।
इसके बाद अमित शाह ने मुख्यमंत्री से अपील की कि गुरदासपुर और संगरूर से जुड़े अन्य दो मामलों की जांच भी CBI को सौंपी जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि झोटा हत्याकांड में जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
शाह के इस बयान के बाद इन मामलों की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर निगाहें टिक गई हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाएगा।
नशे के मुद्दे पर केंद्र और पंजाब सरकार आमने-सामने
पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रहा है। अमित शाह ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि नशे के कारोबार को रोकने में पर्याप्त सफलता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने और पंजाब को नशामुक्त बनाने का संकल्प दोहराया है। झोटा मामले को CBI को सौंपने का फैसला इसी पृष्ठभूमि में आया है।
अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई से नशे के नेटवर्क पर कितना प्रभाव पड़ता है और नशे की आपूर्ति रोकने के लिए प्रशासन जमीन पर कितने प्रभावी कदम उठाता है।
दशहरा समारोह में भी शामिल हुए गृह मंत्री
अपने दिनभर के पंजाब दौरे के अंतिम चरण में अमित शाह लुधियाना के डेरेसी मैदान में दशहरा समारोह में शामिल होने पहुंचे। शहर में उनके आगमन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और यातायात के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी।
दशहरे के अवसर पर उनके पंजाब दौरे ने धार्मिक आयोजन के साथ-साथ नशे के मुद्दे को भी चर्चा में ला दिया। पीड़ित परिवारों से मुलाकात, CBI जांच का मुद्दा और राज्य सरकार पर लगाए गए आरोप इस दौरे के प्रमुख पहलू रहे।


