दिवाली: से पहले दिल्ली की सियासत और बाजारों में हलचल तेज हो गई है। त्योहार के दौरान कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए व्यापारी संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राजधानी में बड़े धरना-प्रदर्शनों और मार्च पर दिवाली तक रोक लगाने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि लगातार हो रहे प्रदर्शनों, सड़कों पर बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंधों के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही घट रही है। इससे उन कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है, जिनके लिए त्योहारों का मौसम साल की सबसे अहम बिक्री अवधि में शामिल होता है।
व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 15 अक्टूबर 2026 को अमित शाह को पत्र लिखकर दिवाली तक बड़े प्रदर्शनों की अनुमति नहीं देने की अपील की। संगठन ने दावा किया कि हालिया प्रदर्शनों के कारण व्यापार को भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ रिपोर्टों में व्यापारियों की ओर से करीब 2,000 करोड़ रुपये तक के नुकसान का दावा सामने आया है। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इसे व्यापार संगठन का दावा समझना चाहिए।
अमित शाह को पत्र लिखकर क्या मांग की गई?
CTI ने केंद्र सरकार से अपील की कि दिवाली तक दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े धरने और मार्च आयोजित करने की अनुमति देने से बचा जाए। संगठन का तर्क है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ती है और दिल्ली के बाजारों में दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करने आते हैं।
व्यापारियों के मुताबिक, यदि प्रदर्शन के कारण सड़कें बंद होती हैं, पुलिस बैरिकेडिंग बढ़ती है या यातायात का मार्ग बदलना पड़ता है, तो ग्राहक बाजार तक पहुंचने से बच सकते हैं। इससे दुकानदारों की बिक्री प्रभावित होने के साथ कर्मचारियों के वेतन, किराये, बिजली-पानी के बिल और अन्य खर्चों का भुगतान करना भी मुश्किल हो सकता है।
CTI ने यह भी चिंता जताई कि बार-बार होने वाले प्रदर्शनों से व्यापारियों और ग्राहकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बनता है। संगठन चाहता है कि प्रशासन ऐसी व्यवस्था करे, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ बाजारों में सामान्य कारोबार भी जारी रह सके।
कनॉट प्लेस में 16 अक्टूबर के मार्च को लेकर चिंता
यह मांग ऐसे समय आई है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क के आसपास ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित करने की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम को लेकर पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की।
नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को जनता के लिए बंद रखने की घोषणा की। दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित मार्च को अनुमति नहीं दी थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही थी।
व्यापारियों की चिंता है कि कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त कारोबारी इलाके में बड़ी भीड़ जुटने से दुकानों, रेस्तरां और आसपास के बाजारों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित हो सकती है। हालांकि, प्रदर्शन से कारोबार पर वास्तविक कितना असर पड़ा, इसका आकलन अलग से किया जाना जरूरी है।

किन बाजारों पर पड़ सकता है असर?
व्यापारी संगठनों ने कनॉट प्लेस के अलावा जनपथ, पालिका बाजार और खान मार्केट जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों का भी उल्लेख किया है। इन इलाकों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी सामान, खानपान और त्योहारों से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी के लिए ग्राहक आते हैं।
दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि नवरात्रि से दिवाली तक का समय खुदरा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी अवधि में कई दुकानें साल की बड़ी बिक्री की उम्मीद करती हैं। यदि ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पाते, तो छोटे दुकानदारों और उन परिवारों की आय पर असर पड़ सकता है, जो इन कारोबारों पर निर्भर हैं।
कुछ व्यापारी संगठनों ने हालिया प्रदर्शनों के दौरान ग्राहकों की आवाजाही में भारी गिरावट आने का दावा किया है। हालांकि, इन दावों के आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना पूरे दिल्ली के बाजारों की स्थिति का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
क्या दिवाली तक प्रदर्शनों पर पूरी तरह रोक लग सकती है?
व्यापारियों की मांग के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार दिवाली तक दिल्ली में बड़े प्रदर्शनों पर व्यापक रोक लगाएगी। फिलहाल व्यापारियों की ओर से मांग रखे जाने और प्रशासन की ओर से किसी औपचारिक निर्णय की घोषणा होने के बीच अंतर है। पत्र भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि रोक लगाने का आदेश जारी हो गया है।
इस मामले में प्रशासन के सामने दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। एक तरफ व्यापारियों की आजीविका, बाजारों की सुरक्षा और सामान्य यातायात बनाए रखने की जिम्मेदारी है। दूसरी तरफ लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध और सभा करने का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी प्रतिबंध का फैसला कानून, सुरक्षा जरूरतों और संबंधित न्यायिक निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए।
दिल्ली में पहले भी प्रदर्शन स्थलों और सार्वजनिक जगहों के इस्तेमाल को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। अदालतों में व्यापारियों और अन्य पक्षों की ओर से याचिकाएं भी दायर की गई हैं। ऐसे में आगे की कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
व्यापार और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन की चुनौती
व्यापारी चाहते हैं कि दिवाली के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही सामान्य रहे और उन्हें कारोबार करने में बाधा न आए। दूसरी ओर, प्रदर्शन आयोजित करने वाले समूह अपनी राजनीतिक मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन के लिए चुनौती यह होती है कि सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था करते हुए दोनों पक्षों के अधिकारों का ध्यान रखा जाए।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि गृह मंत्रालय और दिल्ली प्रशासन व्यापारियों की मांग पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या त्योहारों तक प्रदर्शन स्थलों और यातायात व्यवस्था को लेकर कोई नया निर्देश जारी होगा, या मौजूदा नियमों के तहत ही सुरक्षा प्रबंध किए जाएंगे—यह आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।


