रूस: और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की रणनीति ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई। इस हमले के बाद तेल निर्यात टर्मिनल और रु़ची तेल डिपो में आग लग गई। रूसी अधिकारियों के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और पांच अन्य घायल हुए। इस घटनाक्रम ने उस कथित ऊर्जा युद्धविराम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके तहत दोनों पक्षों से ऊर्जा सुविधाओं पर हमले रोकने की अपेक्षा की जा रही थी।
रूस के अधिकारियों ने दावा किया कि हवाई रक्षा प्रणालियों ने रातभर में बड़ी संख्या में यूक्रेनी ड्रोन को निष्क्रिय किया। वहीं, यूक्रेन का कहना है कि रूस उसके ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रखे हुए है। ऐसे में दोनों देशों के बीच हमलों को रोकने की कोशिश जमीन पर प्रभावी होती दिखाई नहीं दे रही है।
सेंट पीटर्सबर्ग में तेल टर्मिनल और डिपो पर निशाना
रूसी अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन हमले के बाद सेंट पीटर्सबर्ग के बंदरगाह स्थित तेल टर्मिनल और रु़ची तेल डिपो में आग लगी। शहर के आसपास औद्योगिक क्षेत्रों और अन्य प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचने की खबर आई। तेल टर्मिनल रूस के ऊर्जा निर्यात ढांचे का अहम हिस्सा है, इसलिए यहां लगी आग ने सुरक्षा और आपूर्ति से जुड़े सवाल पैदा किए हैं।
हमले के बाद दमकलकर्मियों और आपातकालीन सेवाओं ने आग पर काबू पाने के लिए काम किया। स्थानीय प्रशासन ने हताहतों की जानकारी दी, जबकि हवाई हमलों के खतरे के कारण शहर के हवाई अड्डे पर उड़ानों का संचालन भी प्रभावित हुआ।
रिपोर्टों के अनुसार, रूस की ई-कॉमर्स कंपनी ओजोन के लॉजिस्टिक्स केंद्र और तकनीकी कंपनी वीके के डेटा सेंटर को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, इन प्रतिष्ठानों पर हमलों से हुए नुकसान और सेवाओं पर पड़े प्रभाव का आकलन अलग-अलग हो सकता है।
रूस का दावा: 1,015 ड्रोन किए गए निष्क्रिय
रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रातभर में 1,015 यूक्रेनी ड्रोन निष्क्रिय किए। रूसी पक्ष के अनुसार, ये ड्रोन कई क्षेत्रों के अलावा क्रीमिया और काला सागर के आसपास भी देखे गए।
यह आंकड़ा रूसी रक्षा मंत्रालय का आधिकारिक दावा है। युद्ध की परिस्थितियों में किसी हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन, उन्हें मार गिराने की संख्या और वास्तविक नुकसान का स्वतंत्र सत्यापन कठिन हो सकता है। इसलिए इस आंकड़े को स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्य मानने के बजाय रूसी पक्ष के दावे के रूप में देखना चाहिए।
हमले का पैमाना और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को हुआ नुकसान इस बात की ओर इशारा करता है कि रूस के भीतर स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों पर यूक्रेन की लंबी दूरी की ड्रोन रणनीति जारी है। दूसरी ओर, रूस भी यूक्रेन के शहरों और ऊर्जा ढांचे पर हमले कर रहा है।

ऊर्जा युद्धविराम पर क्यों उठ रहे सवाल?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अक्टूबर को रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने से जुड़े युद्धविराम की घोषणा की थी। हालांकि, इस समझौते की शर्तों और दायरे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही। रूस और यूक्रेन, दोनों ने ट्रंप द्वारा घोषित व्यवस्था की औपचारिक पुष्टि नहीं की थी।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 18 अक्टूबर को दावा किया कि ऊर्जा युद्धविराम की घोषणा के बाद एक सप्ताह के भीतर रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा, तेल और गैस क्षेत्रों पर 76 बार हमले किए। उनके अनुसार, हालिया हमलों में कई क्षेत्रों के बिजली उपकेंद्र प्रभावित हुए और हजारों परिवारों की बिजली आपूर्ति बाधित रही।
जेलेंस्की का आरोप है कि रूस ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर यूक्रेन में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की स्थिति पैदा करना चाहता है। रूस की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग घटनाओं के संदर्भ में अपनी दलीलें दी जाती रही हैं। ऐसे में युद्धविराम के पालन को लेकर दोनों पक्षों के दावे परस्पर विरोधी हैं।
यूक्रेन ने फिर क्यों तेज किए रूस के तेल ठिकानों पर हमले?
यूक्रेन ने रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले फिर शुरू करने के पीछे रूसी हमलों को वजह बताया है। यूक्रेनी नेतृत्व का कहना है कि जब रूस उसके बिजली संयंत्रों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है, तो केवल एकतरफा संयम बनाए रखना उसके लिए मुश्किल है।
इससे पहले रूस के रियाजान क्षेत्र में एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद भी तनाव बढ़ा था। यूक्रेन की रणनीति रूस की तेल प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता पर दबाव बनाने की रही है, जबकि रूस ने ऐसे हमलों की आलोचना करते हुए उन्हें शांति प्रयासों के लिए नुकसानदेह बताया है।
तेल प्रतिष्ठानों पर हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित असर नहीं डालते। इनसे ईंधन उत्पादन, भंडारण, परिवहन और निर्यात पर भी प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, सेंट पीटर्सबर्ग के ताजा हमले से तेल आपूर्ति कितनी प्रभावित हुई है, इसका स्पष्ट आकलन सामने आना अभी बाकी है।
युद्ध का असर आम नागरिकों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर
रूस और यूक्रेन के बीच लगातार हो रहे हमलों का सबसे गंभीर असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने से बिजली, हीटिंग और अन्य जरूरी सेवाएं बाधित हो सकती हैं। रूस में हुए ताजा हमले में भी लोगों के हताहत होने की सूचना दी गई है। वहीं, यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों में रूसी हमलों से नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की खबरें सामने आई हैं।
इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। रूस तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक है। यदि तेल टर्मिनलों, रिफाइनरियों या परिवहन नेटवर्क पर हमले बढ़ते हैं, तो आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। हालांकि, किसी एक हमले के कारण वैश्विक तेल कीमतों में कितना बदलाव आएगा, यह नुकसान की वास्तविक मात्रा, उपलब्ध भंडार और बाजार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।


