- देश: में डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े एक अहम मामले पर UPI MDR को लेकर 28 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। मामला 2000 रुपये से अधिक के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी P2M UPI लेनदेन पर Merchant Discount Rate लागू करने के केंद्र के फैसले से जुड़ा है। याचिका में इस व्यवस्था के कानूनी आधार और लागू करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की 28 सितंबर की सूची के अनुसार मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दायर की है।
UPI MDR क्या है और विवाद किस बात पर है?
केंद्र सरकार ने सितंबर में UPI के कुछ व्यापारी भुगतानों के लिए नया शुल्क ढांचा घोषित किया था। इसके तहत 2000 रुपये से अधिक के चुनिंदा P2M लेनदेन पर सामान्य MDR दर 0.4 प्रतिशत निर्धारित की गई है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।
सरकार ने साथ ही स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेंगे। 2000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले लेनदेन भी मुफ्त रखे गए हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत P2M लेनदेन नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
याचिका में क्या चुनौती दी गई है?
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में केंद्र की 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर को घोषित MDR ढांचे को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि शुल्क व्यवस्था पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लाई गई। इन दावों को फिलहाल याचिका में लगाए गए तर्क के रूप में ही देखा जाना चाहिए; सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
याचिका में Payment and Settlement Systems Act, 2007 की संशोधित धारा 10A के संवैधानिक आधार पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने यह तर्क रखा है कि इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के किन माध्यमों को शुल्क-मुक्त संरक्षण मिलेगा, यह तय करने के लिए कार्यपालिका को दी गई शक्ति पर्याप्त रूप से निर्देशित नहीं है।
याचिका में UPI और RuPay डेबिट कार्ड के बीच किए गए नियामकीय अंतर पर भी सवाल उठाया गया है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने MDR व्यवस्था को रद्द या स्थगित करने तथा भविष्य में शुल्क तय करने के लिए व्यापारी कारोबार, MSME स्थिति, मार्जिन और अन्य परिस्थितियों जैसे कारकों पर विचार करने की मांग की है।
0.4 प्रतिशत MDR किन लेनदेन पर लागू होगा?
सामान्य श्रेणी के चुनिंदा P2M UPI भुगतान में 2000 रुपये से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR निर्धारित है। हालांकि, सरकार के नए ढांचे में कुछ क्षेत्रों के लिए अलग दरें रखी गई हैं।
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक तथा कम-मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। वहीं म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर/डीलर से जुड़े भुगतानों के लिए 0.02 प्रतिशत MDR रखा गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन है।
क्या ग्राहक से सीधे UPI शुल्क लिया जाएगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR ग्राहक से वसूला जाने वाला सरकारी टैक्स नहीं है। यह व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर संबंधित बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और UPI ऐप जैसे इकोसिस्टम प्रतिभागियों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह चिंता भी जताई गई है कि व्यापारी पर बढ़ने वाली लागत का अप्रत्यक्ष प्रभाव ग्राहकों तक पहुंच सकता है। यह फिलहाल याचिकाकर्ता की आशंका है, कोई न्यायिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं।
इसी मुद्दे पर सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच भी चर्चा हुई है। 26 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्यापारियों ने वित्त मंत्रालय को आश्वासन दिया था कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।
UPI MDR मामले की Timeline
14 सितंबर 2026: केंद्र ने Payment and Settlement Systems Act के तहत संबंधित अधिसूचना जारी की।
15 सितंबर 2026: वित्त मंत्रालय ने नए UPI MDR ढांचे की जानकारी दी और NPCI ने संबंधित परिचालन ढांचा जारी किया।
16 सितंबर 2026: UPI MDR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई।
26 सितंबर 2026: सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच MDR को लेकर चर्चा तथा ग्राहकों पर बोझ न डालने के आश्वासन की रिपोर्ट सामने आई।
28 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई निर्धारित है।
15 अक्टूबर 2026: नया MDR ढांचा लागू होने की निर्धारित तारीख है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद स्थिति बदल सकती है।
आम UPI यूजर के लिए इसका क्या मतलब है?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नया ढांचा सभी UPI भुगतानों को शुल्क वाला नहीं बनाता। व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान मुफ्त रहेंगे। 2000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान भी मुफ्त रहेंगे और सरकार के अनुसार छोटे व्यापारियों के लिए लागू शून्य-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन पर भी शुल्क नहीं होगा।
विवाद मुख्य रूप से 2000 रुपये से अधिक के उन निर्दिष्ट P2M लेनदेन पर है, जिन पर नया MDR लागू किया जाना है। इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को भेजे गए बड़े UPI भुगतान को इस MDR के दायरे में समझना सही नहीं होगा।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
28 सितंबर की सुनवाई में अदालत के सामने मुख्य सवाल नए MDR ढांचे के कानूनी आधार और याचिका में उठाई गई आपत्तियों से जुड़े होंगे। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि अदालत इस व्यवस्था को रोक देगी, बदल देगी या बरकरार रखेगी।
15 अक्टूबर की प्रस्तावित लागू तारीख से पहले होने वाली यह सुनवाई UPI के व्यापारी भुगतान ढांचे के लिए महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव है। अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश और आगे की नियामकीय कार्रवाई से स्पष्ट होगी।


