in

‘मिर्च पाउडर से कैसे अंधा करें, घुटने कैसे तोड़ें…’; ट्रिपल मर्डर से पहले टेक इंजीनियर की AI चैट ने खोला बड़ा राज

बेंगलुरु। कर्नाटक के बेंगलुरु में जून 2026 में हुए ट्रिपल मर्डर मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। अब पुलिस जांच में आरोपी टेक कर्मचारी जे. केनेथ की डिजिटल गतिविधियों से जुड़ा एक अहम सुराग सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, उसके लैपटॉप की जांच के दौरान AI से जुड़े ऐसे सवालों की सर्च हिस्ट्री मिली, जिनसे जांचकर्ताओं को वारदात से पहले की उसकी मानसिक तैयारी और गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जांच में सामने आए डिजिटल सुरागों के साथ-साथ 52 लाख रुपये के कर्ज और उससे पैदा हुए पारिवारिक तनाव की कड़ी भी जुड़ती दिखाई दे रही है।

सीगेहल्ली में जून में हुआ था ट्रिपल मर्डर

यह मामला बेंगलुरु के कृष्णराजपुरा इलाके के सीगेहल्ली स्थित एक अपार्टमेंट से जुड़ा है। 22 जून की रात एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

पुलिस जांच के अनुसार मृतकों में श्वेता के पिता, मां और बहन शामिल थे। मामले में श्वेता के लिव-इन पार्टनर जे. केनेथ को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने जांच के दौरान दोनों आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया था।

अब केस की जांच में सामने आए डिजिटल सबूतों ने इस मामले को एक नया आयाम दे दिया है।

लैपटॉप की जांच में सामने आई AI सर्च हिस्ट्री

पुलिस के मुताबिक, फोरेंसिक जांच के दौरान केनेथ के लैपटॉप में AI से संबंधित कई सर्च क्वेरी मिलीं। इनमें हिंसक घटनाओं और लोगों पर हमला करने से संबंधित सवाल शामिल होने का दावा किया गया है।

इन सवालों की पूरी तकनीकी और कानूनी अहमियत अभी जांच का विषय है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी को AI सिस्टम से वास्तव में क्या जवाब मिले थे।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच एजेंसियों के अनुसार अभी तक उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है कि AI ने आरोपी को कौन-सी प्रतिक्रियाएं दी थीं। कुछ सवाल फोरेंसिक जांच के दौरान सामने आई सर्च हिस्ट्री से नोट किए गए थे।

क्या AI ने वारदात की तैयारी में भूमिका निभाई?

पुलिस की जांच में यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण हो गया है कि आरोपी ने AI से संबंधित जानकारी किस उद्देश्य से खोजी थी और क्या इन सर्च का सीधा संबंध अपराध की तैयारी से था।

जांचकर्ताओं का दावा है कि सर्च की टाइमलाइन और बाद में हुई घटनाओं को एक साथ देखा जा रहा है। हालांकि, केवल सर्च हिस्ट्री अपने आप में किसी अपराध की अंतिम पुष्टि नहीं करती। जांच एजेंसियों को इसे अन्य डिजिटल, फोरेंसिक और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखना होगा।

इस मामले ने AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी गंभीर बहस शुरू कर दी है।

52 लाख रुपये का कर्ज बना विवाद की बड़ी कड़ी

पुलिस की चार्जशीट के अनुसार मामले के पीछे आर्थिक तनाव एक महत्वपूर्ण वजह के रूप में सामने आया है।

जांच के मुताबिक, श्वेता ने कथित तौर पर केनेथ की मदद के लिए लगभग 52 लाख रुपये के विभिन्न ऋण लिए थे। इसमें व्यावसायिक और व्यक्तिगत ऋण के अलावा परिचितों तथा रिश्तेदारों से लिया गया पैसा भी शामिल बताया गया है।

जब ऋण की किस्तों और भुगतान को लेकर परेशानी बढ़ी, तो बैंक की ओर से परिवार तक नोटिस पहुंचा। इसके बाद श्वेता के माता-पिता को कथित तौर पर आर्थिक स्थिति और कर्ज की जानकारी मिली। यहीं से परिवार में तनाव और विवाद बढ़ने की बात जांच में सामने आई है।

परिवार को कब पता चला कर्ज का मामला?

चार्जशीट के अनुसार, परिवार को तब गंभीरता से स्थिति का पता चला जब कर्ज से जुड़ी वसूली और नोटिस की प्रक्रिया उनके सामने आई।

इसके बाद श्वेता के पिता ने केनेथ से पैसों को लेकर सवाल किए। पुलिस के मुताबिक, आर्थिक दबाव, पारिवारिक तनाव और लगातार बढ़ती परेशानी ने विवाद को गंभीर रूप दे दिया।

22 जून की रात यही तनाव कथित तौर पर उस घटना में बदल गया, जिसमें परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई।

2,085 पन्नों की चार्जशीट में क्या सामने आया?

इस मामले में अदालत के सामने दाखिल की गई 2,085 पन्नों की चार्जशीट जांच की दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

इसमें पुलिस ने कथित आर्थिक विवाद, डिजिटल गतिविधियों, आरोपी और परिवार के बीच संबंधों तथा घटना से पहले की परिस्थितियों को जांच का हिस्सा बनाया है।

पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों को भी केस की जांच में शामिल किया है। AI से संबंधित गतिविधियों को लेकर भी तकनीकी सबूतों की जांच की जा रही है।

AI कंपनी से भी जानकारी मांगी गई थी

मामले की शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने AI सेवा से संबंधित कंपनी से आरोपी की चैट हिस्ट्री और डिजिटल लॉग उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया था। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि आरोपी ने AI से वास्तव में क्या बातचीत की और उसके सवाल किस संदर्भ में पूछे गए थे।

डिजिटल साक्ष्य को अदालत में इस्तेमाल करने के लिए उसकी प्रामाणिकता और स्रोत की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। इसलिए जांच एजेंसियां सर्च हिस्ट्री के साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को भी जोड़ रही हैं।

मामला सिर्फ AI तक सीमित नहीं

इस पूरे घटनाक्रम को केवल AI के इस्तेमाल के रूप में देखना अधूरा होगा। जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक आर्थिक तनाव, पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत परिस्थितियां भी मामले की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं।

AI सर्च हिस्ट्री जांच में एक डिजिटल सुराग हो सकती है, लेकिन अपराध की पूरी वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए अदालत के सामने सभी साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी होगा।

News Desk

Written by News Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का बड़ा मार्च! संसद से चुनाव आयोग तक सियासी टकराव, दिल्ली में हाई अलर्ट और भारी सुरक्षा

प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की मौत में नया मोड़! CCTV ने बढ़ाए सवाल, 11 दिन बाद भी रहस्य बरकरार