रोहतक, हरियाणा: चार साल की बच्ची के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले में पुलिस जांच के दौरान नया मोड़ सामने आया है। शुरुआत में बच्ची के साथ स्कूल में गलत हरकत होने का आरोप लगाया गया था। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को शुरुआती आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और बच्ची के परिवार से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई।
पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच के बाद बच्ची के पिता और मां को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, बच्ची की काउंसलिंग और उसके बयान से मामले में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। अब जांच टीम घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने और उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि करने में जुटी है।
16 सितंबर को दर्ज हुई थी शिकायत
मामले की शुरुआत 16 सितंबर 2026 को हुई, जब बच्ची की मां ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बच्ची के साथ स्कूल में एक किशोर ने गलत हरकत की थी। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
शिकायत गंभीर प्रकृति की थी, इसलिए जांच में स्कूल से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। पुलिस ने स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से पूछताछ की। साथ ही, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई, ताकि शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में तथ्य सामने आ सकें।
एसआईटी ने जांच का दायरा बढ़ाया
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने डीएसपी तनुज शर्मा के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित किया था। टीम ने स्कूल में घटना होने के आरोपों की जांच की, लेकिन शुरुआती शिकायत के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
इसके बाद जांच केवल स्कूल तक सीमित नहीं रखी गई। पुलिस ने बच्ची के करीबी लोगों और परिवार से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया। इसी दौरान जांचकर्ताओं को बच्ची के पिता के मोबाइल फोन से जुड़ी कुछ जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर उनसे पूछताछ की गई।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के मोबाइल फोन में मिली सामग्री अपने आप में पूरे अपराध का निर्णायक प्रमाण नहीं होती। मामले में आरोपों की पुष्टि संबंधित बयानों, अन्य साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होनी है।

काउंसलिंग और बयान से सामने आई अहम जानकारी
पुलिस के अनुसार, बच्ची की काउंसलिंग बाल कल्याण समिति की मौजूदगी में कराई गई। इस दौरान बच्ची ने कथित उत्पीड़न के संबंध में अपने पिता का नाम लिया। रिपोर्ट की गई जानकारी के मुताबिक, बच्ची ने यह भी बताया कि शुरुआती शिकायत में स्कूल का जिक्र माता-पिता के कहने पर किया गया था।
पुलिस ने बताया कि बच्ची ने अदालत के समक्ष दिए गए बयान में भी अपने पिता पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया। साथ ही, मां को कथित घटना की जानकारी होने की बात भी सामने आई। इन बयानों के आधार पर पुलिस ने माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई की।
चूंकि मामला एक नाबालिग बच्ची से जुड़ा है, इसलिए उसकी पहचान, निजी विवरण और घटना के संवेदनशील पहलुओं को सार्वजनिक करना उचित नहीं है। बच्ची की सुरक्षा और गरिमा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
पांच दिन की रिमांड पर लिए गए आरोपी माता-पिता
पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए पांच दिन की रिमांड पर लिया गया। जांच टीम का उद्देश्य घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाना, बयानों की पुष्टि करना और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस आरोपियों को कथित घटनास्थल पर ले जाकर जांच करने और आसपास के लोगों से पूछताछ करने की भी तैयारी कर रही थी। अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ जारी है और रिमांड अवधि पूरी होने के बाद जांच से जुड़े तथ्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा सकती है।
इस चरण पर मामले की जांच पूरी नहीं मानी जा सकती। गिरफ्तारी और आरोपों के बावजूद अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद ही निकलेगा।
बाल सुरक्षा और संवेदनशील मामलों में जांच का महत्व
यह मामला बच्चों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाली हिंसा की शिकायतों की गंभीरता को रेखांकित करता है। ऐसे मामलों में पुलिस के लिए जरूरी है कि हर शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और किसी भी व्यक्ति को बिना पर्याप्त आधार के दोषी न ठहराया जाए।
बच्चों से जुड़े मामलों में काउंसलिंग प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मदद से और बच्चे की उम्र व मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। परिवार, स्कूल और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की जांच करते समय बच्ची की निजता और सुरक्षा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।


