लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने जेल से रिहा होने के बाद एक बार फिर अपने राजनीतिक तेवर दिखाए हैं।
उन्होंने कहा— “मैं भले ही शांत दिखता हूं, लेकिन भीतर वही पुराना जोश अब भी जिंदा है। मैं बदले में नहीं, इंसाफ में विश्वास रखता हूं। जब मैच दोबारा शुरू होगा, तो मैं फिर बल्लेबाजी करूंगा।”
जांच एजेंसियों पर भरोसा, पर निष्पक्षता की मांग
आजम खान ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि उन्हें जांच एजेंसियों पर भरोसा है, लेकिन वह भरोसा और मजबूत होना चाहिए।
उन्होंने चुनौती दी— “अगर चुनाव किसी निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से कराए जाएं, तो देखना उनके उम्मीदवार अपनी जमानत बचा भी पाते हैं या नहीं।”
“मुसलमान सिर्फ वोट बैंक नहीं”
मुसलमानों को वोट बैंक समझे जाने के सवाल पर आजम खान बोले—
“मुसलमान सिर्फ इस्तेमाल के लिए नहीं हैं। जिन्होंने खुद को इस्तेमाल होने दिया, वह उनकी मर्जी थी।
हमने हमेशा समझदारी से वोट किया है। यूपी में हमने वही सरकारें बनाई हैं, जो जनता के काम आईं।”
“टोपी जेब में रखने वाले मुसलमान नहीं”
ओवैसी को इंडिया गठबंधन में शामिल न किए जाने पर उन्होंने कहा—
“जिन्हें शामिल नहीं किया गया, वे खुद बताएं क्यों नहीं किया गया।
सिर्फ टोपी पहन लेने से कोई मुसलमान नहीं हो जाता।
मैंने ऐसे नेता देखे हैं जो सम्मेलन में टोपी पहनते हैं और खत्म होते ही जेब में डाल लेते हैं।”
“अखिलेश से 45 साल पुराना रिश्ता”
अखिलेश यादव से रिश्तों पर आजम बोले—
“अखिलेश कई बार जेल आए थे, पहले भी और हाल में भी।
रिश्ता मुलाकातों से नहीं टूटता। हमारा रिश्ता 45 साल पुराना है।
मीडिया ने हमें तोड़ने की कोशिश की, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान भी मीडिया ने ही किया।”
“अब खर्च चलाने को घर बेचना पड़ेगा”
अपनी आर्थिक स्थिति पर आजम खान ने कहा—
“आयकर विभाग ने घर पर छापा मारा। मेरे पास 3,500 रुपए, अब्दुल्ला के पास 10,000 रुपए और पत्नी के पास 100 ग्राम सोना मिला।
अब खर्च चलाने के लिए घर बेचना पड़ेगा, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहा।”
“हम बदला नहीं, न्याय देंगे”
2027 के राजनीतिक संभावनाओं पर आजम बोले—
“जब समय आएगा, देखा जाएगा। लेकिन हम बदला नहीं लेते।
अगर हम वही करें जो उन्होंने किया, तो फर्क क्या रह जाएगा।
संभल और बरेली के पीड़ितों को बदला नहीं, न्याय जरूर देंगे।”
“मेरी गलती बस इतनी कि अपने मकसद के प्रति वफादार रहा”
योगी सरकार में कार्रवाई पर आजम ने कहा—
“वह बदला रहा होगा। मैं बदले में नहीं, न्याय में विश्वास रखता हूं।
मुझे आज तक समझ नहीं आया कि मेरी गलती क्या थी।
114 केसों में किसी में भी भ्रष्टाचार या कमीशन का आरोप नहीं है।”
“मैं खुद एक किताब हूं”
राजनीति से संन्यास के सवाल पर आजम बोले—
“अगर मैंने संन्यास ले लिया होता तो आप मुझसे मिलने क्यों आते?
आप तो यह देखने आए हैं कि इस दीपक में अब कितनी लौ बची है।
जहां तक किताब की बात है— मैं खुद एक किताब हूं, बल्कि कई किताबें मेरे साथ चलती हैं।”
“दुश्मनी का कोई मतलब नहीं”
आजम बोले— “मेरे दुश्मन मासूम हैं। दुश्मनी का कोई मतलब नहीं।
मुझे याद भी नहीं कि किस बात की दुश्मनी थी।
मैंने कभी किसी को धर्म या जाति के चश्मे से नहीं देखा।
अगर मेरे किसी शब्द से किसी को चोट पहुंची हो, बताए।”


