लखनऊ: में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा SIR (Special Intensive Revision) फॉर्म भरने के एक ही दिन बाद पार्टी के ही एक नेता ने इस प्रक्रिया पर खुला विरोध जताते हुए बड़ा होर्डिंग लगा दिया। सपा नेता मोहम्मद इखलाक ने सपा कार्यालय के बाहर जो पोस्टर लगाया, उसमें SIR प्रक्रिया को सीधे-सीधे नोटबंदी और अन्य विवादित निर्णयों से जोड़ते हुए बीजेपी सरकार पर जनता पर “थोपे गए फैसलों” का आरोप लगाया गया है।
पोस्टर में लिखा—“हर बड़े फैसले की कीमत जनता ने जान देकर चुकाई”
होर्डिंग में SIR का संदर्भ देते हुए चार बड़े फैसलों के प्रभाव गिनाए गए—
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नोटबंदी — अव्यवस्था की मार
बैंकों की लाइनों में कई मासूमों की जानें गईं। -
काला किसान कानून — अन्नदाताओं की पीड़ा
किसान आंदोलन के दौरान 700 से ज्यादा किसानों की मौत का दावा किया। -
कोविड लॉकडाउन — बिना तैयारी के निर्णय
अचानक लॉकडाउन से हुए पलायन और अव्यवस्था में हजारों मौतों पर सवाल। -
SIR चुनाव ड्यूटी — कर्मचारियों की मजबूरी
काम के दबाव में 10 से अधिक BLO कर्मियों की मौत बताई गई।
पोस्टर में इन मुद्दों से संबंधित खबरों की कटिंग भी छापी गई है।
पोस्टर लगाने वाले सपा नेता बोले— और तेज़ करेंगे मुद्दे
सपा नेता इखलाक ने कहा कि बीजेपी सरकार “ज़मीनी सच्चाई” जाने बिना फैसले करती है और जनता को कष्ट झेलना पड़ता है।
उन्होंने कहा—
“हम जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे। SIR प्रक्रिया को भी जनता पर ज़बरदस्ती थोपना बताया जाएगा।”
SIR क्या है? चुनाव आयोग की स्पेशल प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक Special Intensive Revision (SIR) अभियान शुरू किया है।
इसमें—
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मौजूदा वोटर्स का सत्यापन,
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एक से अधिक जगह दर्ज नाम हटाना,
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मृत व्यक्तियों के नाम हटाना,
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18 वर्ष पूरे कर चुके युवाओं के नाम जोड़ना
जैसे कार्य किए जा रहे हैं। BLO घर-घर जाकर “एन्युमरेशन फॉर्म” दे रहे हैं, जिसे वोटर भरकर वापस करते हैं।
अखिलेश यादव ने खुद भरा SIR फॉर्म, समर्थकों से अपील
27 नवंबर को अखिलेश यादव ने स्वयं SIR फॉर्म भरा और सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए समर्थकों से कहा—
“सब अपना-अपना SIR कराएं और अगर कोई गड़बड़ी दिखे तो बताएं।”
हालांकि उन्होंने SIR प्रक्रिया को BLO कर्मियों पर “अनुचित दबाव” करार देते हुए कहा—
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BLO पर अव्यवहारिक लक्ष्य थोपे जा रहे
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मानसिक दबाव डाला जा रहा
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SIR के दौरान मृत BLO के परिवार को एक करोड़ की सहायता दी जाए
सपा ने खुद कहा कि वह ऐसे मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपए देगी।
लखनऊ में पोस्टरों की सियासत नई नहीं
सपा कार्यालय के बाहर होर्डिंग लगाकर सरकार को घेरने की रणनीति पहले भी दिखी है।
5 महीने पहले सपा नेता जयसिंह प्रताप यादव ने पोस्टर लगाया था—
“ये कैसा रामराज्य? बंद करो पाठशाला, खोलो मधुशाला!”
यह हमला सरकारी स्कूलों के मर्जर पर था।
इसके जवाब में मुख्यमंत्री आवास के पास बीजेपी नेताओं ने बड़ा होर्डिंग लगाया—
“चश्मा हटाइए अखिलेशजी, टोपी मत पहनाइए।”
साथ ही योगी सरकार के शिक्षा सुधारों की लिस्ट भी छापी गई।
निष्कर्ष:
अखिलेश यादव द्वारा SIR फॉर्म भरने के बाद सपा नेताओं का ही विरोध खुलकर सतह पर आ गया है, जिससे पार्टी के अंदर SIR प्रक्रिया को लेकर दोहरी राय सामने आ रही है। एक ओर अखिलेश इसे भरने की अपील कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सपा नेता इसे जनता पर थोपे गए फैसले करार दे रहे हैं। लखनऊ में पोस्टर पॉलिटिक्स से साफ है कि SIR प्रक्रिया अब सिर्फ चुनावी तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक हथियार बन चुकी है।


