in ,

लखनऊ में ढहने लगा सहाराश्री का साम्राज्य: सुब्रत रॉय कोठी समेत 19 संपत्तियों की लीज पर पुनर्विचार, 3 पर कार्रवाई शुरू

47 साल पुराने सहारा इंडिया के साम्राज्य पर खतरे के बादल, प्रशासन ने संपत्तियों की जांच तेज की, कर्मचारियों में फैली चिंता

लखनऊ | एक दौर था जब लखनऊ में सहारा इंडिया परिवार की तूती बोलती थी। हज़ारों की संख्या में कर्मचारियों की भागीदारी, आलीशान इमारतें और कारोबार की चमक ने सहाराश्री सुब्रत रॉय को शहर का एक बड़ा नाम बना दिया था। लेकिन अब 47 साल पुराने इस साम्राज्य पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सहारा की 19 संपत्तियों की लीज की समीक्षा शुरू कर दी है। इनमें सबसे प्रमुख सुब्रतो कोठी (जिसे सहाराश्री का निजी आवास माना जाता है) भी शामिल है। प्रशासन ने इनमें से 3 संपत्तियों पर प्राथमिक कार्रवाई शुरू कर दी है।


कौन-कौन सी संपत्तियां हैं रडार पर?

सूत्रों के मुताबिक, सहारा की जिन 19 संपत्तियों की लीज की समीक्षा की जा रही है, उनमें कई प्रमुख कार्यालय, आवासीय और वाणिज्यिक परिसर शामिल हैं। इनमें:

  • सुब्रतो कोठी, लखनऊ (प्रमुख आवास)

  • सहारा शहर परिसर, गोमतीनगर

  • सहारा अस्पताल से जुड़ी जमीनें

  • वाणिज्यिक भवन, शहीद पथ के पास

इनमें से 3 पर लीज शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


क्यों हो रही है लीज की समीक्षा?

राजस्व विभाग और नगर विकास विभाग की संयुक्त टीम ने इन संपत्तियों की लीज शर्तों और उपयोग के वास्तविक स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि कई संपत्तियां ऐसे कार्यों में उपयोग हो रही थीं, जो लीज के नियमों के अनुसार वैध नहीं हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,

“सरकारी जमीनें सार्वजनिक हित के लिए होती हैं। यदि किसी संस्था ने शर्तों के विरुद्ध उसका उपयोग किया है तो सरकार कार्रवाई के लिए बाध्य है।”


सहारा ग्रुप की गिरती साख और बकाया निवेश

सहारा इंडिया पहले से ही सेबी और निवेशकों के पैसे लौटाने के दबाव में है। हजारों निवेशकों का पैसा अभी भी अटका हुआ है। कोर्ट में कई मामले लंबित हैं और ग्रुप पर लगातार आर्थिक और कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है।

लखनऊ में सहारा के कई दफ्तर वीरान हो चुके हैं। कर्मचारियों की संख्या में भारी गिरावट आई है और वेतन भुगतान में देरी आम हो गई है।


कर्मचारियों और निवेशकों में चिंता का माहौल

जहां एक ओर प्रशासन कार्रवाई के मूड में है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों और निवेशकों में भय और असमंजस का माहौल है। एक पूर्व कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,

“हमने अपना जीवन इस कंपनी को दे दिया। आज जब कंपनी पर सवाल उठ रहे हैं, तो हमारी उम्मीदें और भविष्य अधर में लटक गया है।”


निष्कर्ष:

सहारा इंडिया ग्रुप, जो कभी उत्तर भारत का कॉरपोरेट प्रतीक था, अब ढलती हुई इमारत की तरह नजर आ रहा है। लखनऊ में चल रही ये प्रशासनिक कार्रवाई उस दौर का अंत है, जहां सहाराश्री का नाम ही पहचान हुआ करता था। अब देखने वाली बात ये होगी कि सरकार इन संपत्तियों का क्या वैकल्पिक उपयोग तय करती है और निवेशकों को उनका पैसा वापस मिल पाएगा या नहीं।

News Desk

Written by News Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लखनऊ में 129 केंद्रों पर RO-ARO परीक्षा शुरू: AI से निगरानी, 8:45 बजे गेट बंद, लेट आने वालों को नहीं मिली एंट्री

LDA की वरुण विहार योजना पर बढ़ा खर्च: नए सर्किल रेट से 1000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत