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लखनऊ में 129 केंद्रों पर RO-ARO परीक्षा शुरू: AI से निगरानी, 8:45 बजे गेट बंद, लेट आने वालों को नहीं मिली एंट्री

UPPSC की RO/ARO परीक्षा में लखनऊ के 61,512 अभ्यर्थी शामिल, हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा शांतिपूर्ण शुरू

लखनऊ | उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा आयोजित समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) की लिखित परीक्षा आज से शुरू हो गई है। राजधानी लखनऊ में इसके लिए 129 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 61,512 अभ्यर्थी शामिल हुए।

सुबह 8:45 बजे गेट बंद, लेट आने वालों को नहीं मिली परीक्षा देने की अनुमति

परीक्षा केंद्रों पर सुबह 8 बजे से ही अभ्यर्थियों की भीड़ उमड़ने लगी थी। आयोग ने साफ निर्देश दिए थे कि गेट 8:45 बजे तक ही खुले रहेंगे, इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को अंदर प्रवेश नहीं मिलेगा। कई अभ्यर्थी जो 2-5 मिनट की देरी से पहुंचे, उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। इसको लेकर कुछ केंद्रों पर हल्का विरोध भी देखा गया, लेकिन अधिकारी पूरी सख्ती से नियमों को लागू करते नजर आए।

AI आधारित निगरानी से परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित

इस बार परीक्षा की निगरानी AI आधारित कैमरा सिस्टम और लाइव मॉनिटरिंग के ज़रिए की जा रही है। परीक्षा केंद्रों पर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे, फेस डिटेक्शन और ऑटो अलर्ट सिस्टम के जरिए किसी भी गड़बड़ी की तुरंत सूचना कंट्रोल रूम को मिल रही है। परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह तकनीक पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लागू की गई है।

कुल अभ्यर्थियों की संख्या और केंद्रों का विवरण

  • लखनऊ में केंद्रों की संख्या: 129

  • परीक्षार्थियों की कुल संख्या: 61,512

  • परीक्षा का समय: सुबह 9:30 से दोपहर 12:30 बजे तक

  • प्रवेश समय: सुबह 8:00 से 8:45 बजे तक

कई परीक्षार्थी लेट होने से निराश

लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर 3 पर पहुंचे अभ्यर्थी राहुल कुमार ने बताया, “मैं 8:48 पर पहुंचा लेकिन अंदर नहीं जाने दिया गया। बस कुछ ही मिनट लेट हो गया और अब एक साल की मेहनत पर पानी फिर गया।” वहीं परीक्षा केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि “समय का पालन ही परीक्षा की निष्पक्षता की नींव है।”

परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न कराने के निर्देश

UPPSC और जिला प्रशासन ने केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि परीक्षा शांतिपूर्वक और निष्पक्ष तरीके से आयोजित हो। सभी केंद्रों पर मजिस्ट्रेट रैंक के अधिकारी, CCTV निगरानी, और पुलिस बल की तैनाती की गई है।


निष्कर्ष:

RO-ARO जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के भविष्य का आधार होती हैं। ऐसे में आयोग की सख्ती और आधुनिक तकनीक का उपयोग एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, परीक्षा देने वाले छात्रों को समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि एक छोटी सी चूक उनका एक साल बर्बाद कर सकती है।

News Desk

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