लखनऊ | मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुहर्रम के अवसर पर बड़ा इमामबाड़ा से 72 ताबूतों का ऐतिहासिक जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में निकाला गया, जिसमें हजारों अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया और नम आंखों से ताबूतों की जियारत की।
???? बड़ा इमामबाड़ा बना मातमगाह
बड़ा इमामबाड़ा परिसर मंगलवार को पूरी तरह से मातमी रंग में रंगा नजर आया। 72 ताबूतों की जियारत के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचे। अकीदतमंदों ने गुलाबजल, इत्तर और फूलों से ताबूतों को सजाया और उन्हें श्रद्धा से चूमा। माहौल में गम और मोहब्बत का संगम देखने को मिला।
????️ मौलाना तकी रज़ा ने किया जनाबे सकीना की शहादत का जिक्र
मजलिस को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध आलिम मौलाना तकी रज़ा ने जब जनाबे सकीना की तकलीफ और शहादत का जिक्र किया, तो वहां मौजूद हर आंख भर आई। उन्होंने कहा –
“कर्बला सिर्फ एक जंग नहीं थी, यह इंसानियत, बलिदान और सच्चाई की सबसे बड़ी मिसाल थी। जनाबे सकीना का दर्द हर दिल को हिला देता है।”
????️ क्या है 72 ताबूतों का महत्व?
इस मुहर्रम के जुलूस में निकाले गए 72 ताबूत प्रतीक हैं उन 72 शहीदों के, जो कर्बला की जंग में हक और इंसाफ के लिए शहीद हुए थे। हर ताबूत एक शहीद की याद को समर्पित होता है — हजरत अब्बास, हजरत अली अकबर, हजरत कासिम, जनाबे सकीना जैसे नाम आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
????♂️ शहर भर से उमड़ा जनसैलाब
इस मातमी जुलूस में न केवल लखनऊ बल्कि कानपुर, बनारस, अमेठी, रायबरेली, सीतापुर और अन्य जिलों से भी अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। कई महिलाओं और बच्चों ने भी काले कपड़े पहनकर मातम में हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा।
???? भावुक क्षणों की झलकियां:
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एक बच्चा ताबूत से लिपटकर रोता दिखा
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महिलाओं ने मिलकर जनाबे सकीना के ताबूत की चादर बदली
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ताबूतों पर चढ़ाए गए गुलाब के फूल और चादरें
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मजलिस के दौरान हर आंख नम दिखी
???? निष्कर्ष:
मुहर्रम का यह जुलूस सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि कर्बला के अद्वितीय बलिदान की जीवंत याद है। लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा हर साल इस इतिहास को दोहराता है और इंसानियत, त्याग और सच्चाई के पैगाम को फैलाता है।


