लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रविकांत द्वारा बजरंगबली के भक्त और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। लखनऊ के एक महंत ने रविकांत के बयान को न केवल “मानसिकता दूषित” बताया, बल्कि उन पर मानहानि का केस करने की भी मांग की है।
‘धर्मांतरण की फैक्ट्री पर चुप, संतों पर टिप्पणी’
महंत ने कहा कि रविकांत जैसे लोग धर्मांतरण की फैक्ट्री और समाज को तोड़ने वाले तत्वों पर कुछ नहीं बोलते, लेकिन संतों और सनातन संस्कृति पर टिप्पणी करने से पीछे नहीं हटते। उन्होंने इसे कुत्सित विचारधारा की उपज बताया।
‘सनातन धर्म लचीला है, लेकिन अपमान सहन नहीं’
महंत के अनुसार, सनातन धर्म की विशेषता इसका लचीलापन और सहिष्णुता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति बार-बार इसका अपमान करे। उन्होंने कहा, “सनातन को बार-बार निशाना बनाना बंद होना चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री पर की गई टिप्पणी निंदनीय है और कानूनी कार्रवाई जरूरी है।”
विवाद के पीछे की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रोफेसर रविकांत ने एक सार्वजनिक बयान में धीरेंद्र शास्त्री के बारे में ऐसी टिप्पणी की जिसे समर्थकों ने अपमानजनक और धार्मिक भावनाएं आहत करने वाला बताया। बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के समर्थकों में तीखी बहस शुरू हो गई।
कानूनी कार्रवाई की मांग
महंत ने साफ कहा कि इस मामले में मानहानि का केस दर्ज होना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी बिना तथ्य और प्रमाण के संतों पर टिप्पणी करने से पहले सोचे।
निष्कर्ष:
रविकांत और धीरेंद्र शास्त्री के बीच यह विवाद लखनऊ से निकलकर सोशल मीडिया और धार्मिक गलियारों में बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखने वाली बात होगी कि महंत की मांग पर कोई कानूनी कदम उठाया जाता है या मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है।


