लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बैंक लोन से जुड़े बड़े फ्रॉड गैंग का पर्दाफाश हुआ है। राज्य सुरक्षा बल (STF) ने एक साजिश के तहत यूनियन बैंक के ब्रांच मैनेजर गौरव सिंह को गिरफ्तार किया है। जांच में यह खुलासा हुआ कि गौरव सिंह अपने पद का दुरुपयोग करके फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये का लोन हासिल कर पूरे नेटवर्क के साथ मिलकर धोखाधड़ी कर रहा था। इस गिरोह ने अब तक 20 से अधिक कारों के लोन पास कराकर BMW, बलेनो, महिंद्रा सुप्रो, सुजुकी फ्रॉन्क्स जैसी लग्जरी गाड़ियों का कब्जा बनाया था।
खुलासा: फर्जी दस्तावेजों से कार लोन
STF की गहन जांच में सामने आया कि गैंग का सरगना इंद्रजीत सिंह ग्राहकों को लोन दिलाने के बहाने फंसाता था। इसके बाद साथी सदस्य नावेद हसन व अखिलेश तिवारी नकली आधार-पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार करते थे। यूनियन बैंक की जानकीपुरम ब्रांच के मैनेजर गौरव सिंह बैंक सिस्टम में लॉगिन करके फर्जी लोन की फाइलें अप्रूव करता था।
राज बहादुर गुरुंग नामक पीड़ित को 2-3 लाख रुपए के लोन के लिए अप्लाई कराया गया था, लेकिन उनके नाम से 24.8 लाख रुपये के दो अलग-अलग लोन निकाले गए थे। इसके बाद पीड़ित को ईएमआई का मैसेज आना शुरू हो गया। STF की कार्रवाई के बाद इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ।
बरामद संपत्ति और फर्जी हब
गिरफ्तारी के समय STF को 268 फर्जी दस्तावेज, नकली आधार-पैन व ड्राइविंग लाइसेंस, 5 मोबाइल फोन, डेस्कटॉप कंप्यूटर, प्रिंटर, 2 चेकबुक और ₹50,750 कैश बरामद हुआ। आरोपियों के कब्जे से BMW X1, बलेनो, महिंद्रा सुप्रो व सुजुकी फ्रॉन्क्स जैसी लग्जरी कारें भी जब्त की गईं। इनका संचालन एक फ्लैट को ‘मिनी फ्रॉड ऑफिस’ में बदल कर किया जा रहा था।
STF की बड़ी कार्रवाई
STF ने आरोपियों की संपत्ति व आर्थिक लेन-देन का ब्यौरा खंगालने के लिए ED और इनकम टैक्स विभाग को रिपोर्ट भेजी है। इसके अलावा बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। अन्य बैंकों से भी डेटा मांगा गया है, ताकि यह पता चल सके कि यह गिरोह किन किन ब्रांचों और शहरों में सक्रिय था।
गिरोह का खेल: कमीशन सिस्टम
जांच में यह भी सामने आया कि इंद्रजीत, गौरव, नावेद और अखिलेश ने अपने-अपने काम बांटे थे। गौरव सिंह बैंक फाइलों को अप्रूव करता था, जबकि अन्य सदस्य फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। लोन की रकम फर्जी कंपनियों के खातों में जाती थी और फिर गिरोह के बीच में बांटी जाती थी। प्रति केस 20 प्रतिशत कमीशन देने की व्यवस्था थी।
अतीत में भी पकड़े जा चुके थे गैंग
पिछले वर्ष चारबाग और कानपुर में भी ऐसे गिरोह पकड़े गए थे, लेकिन इस बार यूनियन बैंक मैनेजर का शामिल होना इस मामले को सबसे बड़ा बना रहा है। STF का दावा है कि यह केवल शुरुआत है और जल्द ही और बड़े नाम बेनकाब होंगे।
लोगों के लिए चेतावनी
STF ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। बैंक में किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की सलाह दी गई है। इस मामले में आगे की जांच जारी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का पूरा खुलासा किया जाएगा।
निष्कर्ष:
लखनऊ में फर्जी लोन मामले में बैंक मैनेजर समेत गिरोह के सदस्य गिरफ्तार किए जाने से वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। STF की सक्रियता से यह गिरोह बेनकाब हुआ है। आने वाले समय में और भी खुलासे संभव हैं। आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि ऐसे काले खेलों से बचा जा सके।


