दिल्ली: दंगा मामले में लंबे समय से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं और साथ ही इस मामले में एक साल तक दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने पर रोक भी लगा दी।
हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफा-उर-रहमान—को 12 कड़ी शर्तों के साथ जमानत दे दी है।
उमर खालिद 13 सितंबर 2020 से और शरजील इमाम 28 जनवरी 2020 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। यानी दोनों आरोपियों को 5 साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में रखा गया है।
क्या था मामला?
उमर खालिद, शरजील इमाम समेत कुल 7 आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में UAPA के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था।
फरवरी 2020 में भड़के दिल्ली दंगों में
- 53 लोगों की मौत,
- 250 से ज्यादा घायल,
- और 750 से अधिक FIR दर्ज की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 5 बड़ी बातें
यह फैसला जस्टिस अरविंद और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा:
- उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से अलग और केंद्रीय (मुख्य) है।
- लंबी हिरासत के बावजूद यह संविधान या कानून का उल्लंघन नहीं है।
- अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का मतलब यह नहीं कि गंभीर मामलों में ट्रायल से पहले जमानत स्वतः मिल जाए।
- UAPA एक विशेष कानून है, जहां राज्य की सुरक्षा से जुड़े मामलों में देरी को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
- उमर और शरजील एक साल बाद या संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद ही फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकेंगे।
5 आरोपियों को जमानत, लेकिन सख्त शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि 5 आरोपियों को जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि आरोप कमजोर हैं।
यदि 12 में से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो ट्रायल कोर्ट को जमानत रद्द करने की पूरी छूट होगी।
उमर खालिद की प्रतिक्रिया
उमर खालिद की साथी बानो ज्योत्सना लाहिरी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि उमर ने उनसे कहा:
“जिन लोगों को जमानत मिली है, उनके लिए मैं खुश हूं।
अब तो जेल ही मेरी ज़िंदगी बन गई है।”
अब तक 6 बार जमानत याचिका, हर बार निराशा
उमर खालिद अब तक
- ट्रायल कोर्ट,
- हाईकोर्ट
- और सुप्रीम कोर्ट में 6 बार जमानत याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं, लेकिन हर बार राहत नहीं मिली।
अदालतों का पूरा टाइमलाइन:
ट्रायल कोर्ट
- 24 मार्च 2022: जमानत खारिज
- 28 मई 2024: दूसरी बार खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट
- 18 अक्टूबर 2022: पहली याचिका खारिज
- 2 सितंबर 2025: संशोधित याचिकाएं खारिज
सुप्रीम कोर्ट
- 14 फरवरी 2024: याचिका वापस ली
- 5 जनवरी 2026: जमानत याचिका खारिज
पुलिस का बड़ा दावा
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि
- दंगे पूर्व नियोजित साजिश थे
- मकसद था सत्ता पर दबाव और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान
- डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान दंगे कराकर वैश्विक ध्यान खींचना था
पुलिस के अनुसार,
CAA के विरोध को कट्टरपंथीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया और इसके लिए
- WhatsApp ग्रुप
- Delhi Protest Support Group (DPSG)
- Jamia Awareness Campaign
जैसे नेटवर्क सक्रिय थे।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि दिल्ली दंगा मामला सिर्फ लंबी हिरासत का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर कानूनी मुद्दा है। उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है, जबकि अन्य आरोपियों को सशर्त जमानत देकर अदालत ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। अब इस केस में अगला बड़ा मोड़ ट्रायल की गति और गवाहों की गवाही पर निर्भर करेगा।


