बिहार: विधानसभा चुनाव अभियान अब रफ्तार पकड़ चुका है।
राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने अपने प्रचार अभियान के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को रखा है।
राजग के नए चुनावी नारे — “25 से 30 नरेंद्र और नीतीश” — की झलक पीएम मोदी की हर रैली में दिखाई देगी।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी दो चरणों में हो रहे चुनाव के प्रत्येक चरण में पांच-पांच जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
इन सभी जनसभाओं में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच साझा करेंगे, जिससे राजग की एकजुटता और साझा नेतृत्व का संदेश जनता तक पहुंचेगा।
पीएम मोदी और नीतीश का संयुक्त प्रचार अभियान
इस बार राजग ने साझा चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई है।
मतलब यह कि प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों में भाजपा और जदयू दोनों के वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहेंगे।
वहीं नीतीश कुमार की जनसभाओं में भी भाजपा के प्रमुख चेहरे, जैसे गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, साथ रहेंगे।
सूत्रों के मुताबिक,
“इस रणनीति का उद्देश्य मोदी-नीतीश की जोड़ी को बिहार में विकास और स्थिरता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना है।”
नीतीश हर दिन चार रैलियां करेंगे, मोदी की हर रैली में रहेंगे साथ
नीतीश कुमार न केवल पीएम मोदी की रैलियों में मौजूद रहेंगे, बल्कि हर दिन चार व्यक्तिगत जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी कुल 10 जनसभाएं (हर चरण में पांच) करेंगे।
दोनों नेताओं के साथ-साथ भाजपा के शीर्ष नेता भी चुनावी मैदान में उतरेंगे —
-
अमित शाह — 25 रैलियां
-
राजनाथ सिंह — 25 रैलियां
-
जेपी नड्डा — 25 रैलियां
सीमांचल में सीएम योगी आदित्यनाथ का फोकस
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पार्टी ने विशेष रूप से घुसपैठ प्रभावित सीमांचल इलाकों की जिम्मेदारी दी है।
वे कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जिलों में कई जनसभाएं करेंगे, जहां राजग को अपनी स्थिति मजबूत करनी है।
इसके अलावा योगी की रैलियां खगड़िया, मुंगेर, सारण, दरभंगा और मधुबनी में भी होंगी।
पार्टी की रणनीति है कि योगी की कठोर छवि और राष्ट्रवादी भाषण शैली सीमांचल के मतदाताओं में जोश भरें और विपक्ष के वोट बैंक में सेंध लगाएं।
‘साझा प्रचार’ से विपक्ष को घेरने की रणनीति
राजग ने इस बार अपने नेताओं की अलग-अलग जनसभाओं की जगह साझा प्रचार का रास्ता चुना है।
यह कदम न सिर्फ एकता का संदेश देता है, बल्कि विपक्ष के “नेतृत्व संकट” के मुद्दे को भी उभारता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि
“मोदी और नीतीश दोनों की छवि अब भी विकास और स्वच्छ राजनीति के प्रतीक के रूप में बनी हुई है। इसी कारण विपक्ष सीधा हमला करने से बच रहा है।”
राजग का ‘विजन कैंपेन’: मोदी-नीतीश की डबल लीडरशिप
भाजपा और जदयू की रणनीति साफ है —
चुनाव प्रचार को “मोदी-नीतीश केंद्रित” रखना और विपक्ष को एकजुटता व स्थिरता के मुद्दे पर चुनौती देना।
राजग का दावा है कि “दो दशक तक सीएम रहने वाले नीतीश कुमार और 11 साल से पीएम पद पर काबिज मोदी” मिलकर बिहार के विकास की गारंटी हैं।


