रिपोर्ट: प्रकाश सिंह
पटना। बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। हालिया विधानसभा चुनावों में एनडीए को मिले स्पष्ट जनादेश के बाद अब राजनीतिक परिदृश्य बिल्कुल साफ हो चुका है। सत्ता की बागडोर एक बार फिर नीतीश कुमार के हाथों में जाती हुई दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, राजभवन और गठबंधन के शीर्ष नेताओं के बीच गहन मंथन चल रहा है और 20 या 22 नवंबर को नई सरकार के शपथ-ग्रहण की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
एनडीए में सहमति, नीतीश कुमार पर फिर भरोसा
चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि जनता ने विकास और स्थिरता के पक्ष में मतदान किया है। एनडीए नेताओं के बीच लगातार हुई बैठकों में यह सर्वसम्मति उभरकर आई है कि अनुभवी नेता होने के नाते राज्य को अगले कार्यकाल में भी नीतीश कुमार ही नेतृत्व देंगे।
जदयू के भीतर विधायकों की बैठक में भी नीतीश के नाम पर सहमति बन चुकी है। वहीं भाजपा नेतृत्व भी चुनाव के बाद से ही यह संकेत दे रहा है कि गठबंधन नीतीश के नेतृत्व में सुचारू रूप से आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “सुशासन की जीत” कहे जाने को भी इसे सीधा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
शपथ-ग्रहण समारोह की तैयारी—प्रशासन में तेज़ी
सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक स्तर पर शपथ-ग्रहण समारोह की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। पटना के प्रमुख सरकारी और प्रशासनिक दफ़्तरों में सुरक्षा, प्रोटोकॉल और कार्यक्रम स्थल के विकल्पों पर समीक्षा बैठकों की लंबी श्रृंखला चल रही है।
राजभवन परिसर,
गांधी मैदान,
और मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर
इन तीन स्थानों को सबसे उपयुक्त बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। डीजीपी मुख्यालय से जिलों को सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।
मंत्रिमंडल का आकार बड़ा हो सकता है
नई सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर गठबंधन में विचार-विमर्श जारी है। भाजपा और जदयू दोनों अपने-अपने समीकरण को साधने में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि:
भाजपा को दो उपमुख्यमंत्री पद मिल सकते हैं
जदयू को प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी
गठबंधन के छोटे दलों के लिए भी राज्यमंत्री पद सुरक्षित रखे जा सकते हैं
नई सरकार शिक्षा सुधार, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, उद्योगों को बढ़ावा और रोजगार सृजन को लेकर बड़े फैसले ले सकती है।
नीतीश कुमार रचेंगे इतिहास—10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ संभव
इस बार का शपथ-ग्रहण ऐतिहासिक भी हो सकता है, क्योंकि यह नीतीश कुमार का दसवां कार्यकाल होगा। भारतीय राजनीति में यह एक दुर्लभ उदाहरण है कि कोई नेता लगातार इतने लंबे समय तक किसी राज्य की राजनीति में सक्रिय और प्रभावी बना रहता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे “लगातार जनसमर्थन और प्रशासनिक विश्वास का प्रमाण” बता रहे हैं।
पटना से दिल्ली तक हलचल—मुख्य मेहमानों की सूची भी तैयार होने लगी
सूत्रों में यह भी चर्चा है कि शपथ-ग्रहण समारोह में केंद्र सरकार के कई शीर्ष नेता, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रमुख उद्योगपति शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम को भव्य बनाने की तैयारी है और इसे बिहार के विकास के लिए नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
जनता की निगाहें राजभवन की ओर—आधिकारिक तारीख का इंतजार
पूरा बिहार इस इंतजार में है कि नई सरकार की तारीख का आधिकारिक ऐलान कब होगा। राजनीतिक गतिशीलता और प्रशासनिक तैयारियों से यह स्पष्ट हो चुका है कि अगले कुछ दिनों में सत्ता का नया अध्याय शुरू होने वाला है।


