लखनऊ।
उत्तर प्रदेश भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने शनिवार को लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके अलावा किसी अन्य नेता ने नामांकन नहीं किया, जिससे उनका निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय हो गया है।
नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पंकज चौधरी के प्रस्तावक बने। उनके साथ दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत पार्टी के 10 वरिष्ठ नेताओं ने नाम का समर्थन किया। औपचारिक घोषणा रविवार को लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा की जाएगी।
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मां हुईं भावुक, आंखों से छलक पड़े आंसू
इधर, जैसे ही गोरखपुर स्थित पंकज चौधरी के आवास पर उनकी मां उज्ज्वला देवी को बेटे के यूपी भाजपा अध्यक्ष बनने की खबर मिली, वह भावुक हो गईं। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर से बातचीत के दौरान उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा—
“बस यही आशीर्वाद है कि बेटा आगे बढ़े और अच्छा काम करे।”
मां की भावुक प्रतिक्रिया ने इस राजनीतिक खबर को मानवीय संवेदना से भी जोड़ दिया।
दिनभर बना रहा सस्पेंस
शनिवार को दोपहर ढाई बजे तक प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर सस्पेंस बना रहा। सुबह करीब 11 बजे पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के भाजपा कार्यालय पहुंचने से अटकलें तेज हो गई थीं। उनसे जब नए अध्यक्ष को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा— “थोड़ी देर में सब सामने आ जाएगा।”
दोपहर करीब डेढ़ बजे जब पंकज चौधरी दिल्ली से लखनऊ पहुंचे तो उन्होंने भी सीधे तौर पर कुछ कहने से बचते हुए कहा कि पार्टी कार्यालय पहुंचने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
हालांकि कुछ देर बाद भाजपा नेता स्वतंत्र देव सिंह ने बिना नाम लिए संकेत देते हुए कहा—
“नए अध्यक्ष 7 बार के सांसद हैं और अपने समाज में बेहद लोकप्रिय हैं।”
यह इशारा साफ तौर पर पंकज चौधरी की ओर था।
क्यों पंकज चौधरी पर लगाया गया दांव
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, पंचायत और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने ओबीसी वर्ग के कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को संगठन की कमान सौंपी है। यूपी में यादवों के बाद कुर्मी समाज की आबादी सबसे अधिक मानी जाती है।
2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मी समाज का एक हिस्सा विपक्ष के साथ गया था। ऐसे में भाजपा अब इस सामाजिक आधार को फिर से मजबूत करना चाहती है।
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राजनीतिक सफर और संगठनात्मक महत्व
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पंकज चौधरी महाराजगंज से 7 बार सांसद रह चुके हैं।
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राजनीति की शुरुआत पार्षद के रूप में की, गोरखपुर के डिप्टी मेयर भी रहे।
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1991 में पहली बार सांसद बने।
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ओबीसी की कुर्मी बिरादरी से आते हैं।
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यूपी भाजपा के वे चौथे कुर्मी समाज से आने वाले प्रदेश अध्यक्ष होंगे।
(इससे पहले विनय कटियार, स्वतंत्र देव सिंह और ओम प्रकाश सिंह यह जिम्मेदारी निभा चुके हैं।)
गोरखपुर की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी को भाजपा के दो बड़े क्षत्रप माना जाता है। एक के पास सरकार की कमान है तो दूसरे को संगठन की जिम्मेदारी सौंपना राजनीतिक संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है।
पंकज चौधरी का यूपी भाजपा अध्यक्ष बनना न केवल संगठनात्मक बदलाव है, बल्कि आगामी चुनावों को देखते हुए एक स्पष्ट सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का संकेत भी देता है। अनुभवी सांसद, केंद्रीय मंत्री और ओबीसी वर्ग से आने वाले नेता के रूप में उनसे संगठन को मजबूत करने और नए सिरे से चुनावी तैयारी को धार देने की उम्मीद की जा रही है। मां की भावुक प्रतिक्रिया ने इस राजनीतिक क्षण को व्यक्तिगत और मानवीय रूप भी दे दिया।


