नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र 2026 इस साल 28 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र में अभिभाषण से होगी। इसके बाद सदन में निर्धारित अवधि के लिए विधायी कामकाज का निपटारा किया जाएगा।
बजट सत्र से पहले सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक 27 जनवरी को सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में होगी। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू द्वारा बुलाई गई इस बैठक में सरकार और विपक्ष सत्र के एजेंडे और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसका उद्देश्य सत्र को सुचारु रूप से चलाना और सभी दलों की राय जानना है।
बजट सत्र की महत्वपूर्ण तारीखें
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27 जनवरी: सर्वदलीय बैठक
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28 जनवरी: राष्ट्रपति का अभिभाषण और संयुक्त सत्र
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1 फरवरी: केंद्रीय बजट पेश, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवां बजट पेश करेंगी (इतिहास में दुर्लभ अवसर)
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2 अप्रैल: बजट सत्र का समापन
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13 फरवरी: सत्र का पहला चरण समाप्त
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9 मार्च: सत्र का दूसरा चरण शुरू
विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने
इस सत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष मुख्य मुद्दों पर आमने-सामने होंगे। कांग्रेस देशभर में “विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम” को लेकर अभियान चला रही है। कांग्रेस का कहना है कि यह कानून UPA के मनरेगा कानून की जगह लाया गया है। वहीं, भाजपा इसे सुधारवादी कानून बताकर पुरानी व्यवस्थाओं की खामियों को दूर करने की जरूरत पर जोर दे रही है। सत्र के दौरान इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना है।
लंबित विधेयक और वैश्विक दबाव
लोकसभा में फिलहाल नौ विधेयक लंबित हैं, जिनमें शामिल हैं:
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विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025
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सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड 2025
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संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024
ये विधेयक वर्तमान में संसदीय समितियों के पास विचाराधीन हैं।
साथ ही, बजट सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अमेरिका की टैरिफ नीतियों का असर दिख रहा है।
अन्य अहम जानकारी
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राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा 2 से 4 फरवरी तक होगी।
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28 जनवरी और 1 फरवरी को शून्यकाल नहीं होगा।
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सरकार ने सर्वदलीय बैठक के जरिए सियासी सहमति बनाने की कवायद तेज कर दी है।
संसद का बजट सत्र 2026 इस बार महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति अभिभाषण और 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट के साथ सत्र की शुरुआत होगी। विपक्ष-सत्ता पक्ष के बीच प्रमुख विधेयकों और कानूनों पर कड़ी बहस की संभावना है। सर्वदलीय बैठक से सरकार की कोशिश है कि सत्र सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से चले।


