राजस्थान: की धार्मिक नगरी पुष्कर में आयोजित शत (100) गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इस भव्य आयोजन को वैश्विक स्तर पर बड़ी मान्यता मिली है, जहां इसे 12 अंतरराष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया है। खास बात यह है कि इस महायज्ञ को कलियुग का पहला शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ भी घोषित किया गया है।
यह महायज्ञ यज्ञ सम्राट स्वामी प्रखर महाराज के सानिध्य में 8 मार्च से 19 अप्रैल तक कुल 43 दिनों तक चला। इस दौरान देशभर के विद्वान ब्राह्मणों, शंकराचार्यों, जगद्गुरुओं और महामंडलेश्वरों ने भाग लिया। लाखों की संख्या में श्रद्धालु भी इस आयोजन से जुड़े और निरंतर परिक्रमा तथा मंत्र जप में सहभागिता निभाई।
वैश्विक संस्थाओं ने दी मान्यता
इस महायज्ञ की भव्यता और प्रभाव को देखते हुए लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंसी, इंग्लैंड जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसे 12 अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया। यह उपलब्धि न केवल आयोजन की विशालता को दर्शाती है, बल्कि इसके आध्यात्मिक और सामाजिक प्रभाव को भी प्रमाणित करती है।
संस्था के संरक्षक प्रो. कमलाकांत त्रिपाठी ने बताया कि आयोजन की विस्तृत जानकारी विश्वभर की प्रमुख अवार्ड संस्थाओं को भेजी गई थी। इसके उद्देश्य, वैदिक पद्धति और व्यापक सहभागिता को देखते हुए इसे वैश्विक पहचान मिली।
27 करोड़ गायत्री मंत्र जप बना विशेष उपलब्धि
इस महायज्ञ की सबसे बड़ी विशेषता रही 27 करोड़ गायत्री मंत्रों का जप, जिसे त्रिकाल संध्या गायत्री साधना में निष्ठावान ब्राह्मणों द्वारा संपन्न किया गया। यह अपने आप में एक अद्वितीय और अभूतपूर्व आध्यात्मिक उपलब्धि मानी जा रही है।
इसके अलावा, 43 दिनों तक लगातार चलने वाली साधना श्रृंखला को भी विश्व में सबसे लंबी सतत आध्यात्मिक साधना के रूप में मान्यता दी गई है।

विश्व शांति और सनातन उत्थान का संकल्प
महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य विश्व शांति, आतंकवाद के शमन और सनातन वैदिक धर्म के प्रसार को मजबूत करना था। आयोजन में पर्यावरण शुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार और “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के यज्ञ न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिक चेतना को भी मजबूत करते हैं।
आयोजन को सफल बनाने में टीम का योगदान
इस महायज्ञ को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में ‘सनातन वैदिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि उत्थान समिति’ की अहम भूमिका रही। समिति के अध्यक्ष डॉ. रामप्रिय पांडेय, उपाध्यक्ष हर्ष पाराशर, महामंत्री डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय और कार्यालय मंत्री अनुष्का भट्ट ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
साथ ही, श्री श्री 1008 मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास को भी इस उपलब्धि के लिए विश्व रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह में उमड़ा जनसैलाब
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद आयोजित सम्मान समारोह में हजारों श्रद्धालु और गणमान्य लोग शामिल हुए। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे की उपस्थिति में स्वामी दयानंद शास्त्री ने स्वामी प्रखर महाराज को प्रमाण पत्र और मेडल प्रदान किए।
क्यों खास है यह उपलब्धि
यह महायज्ञ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है। वैदिक परंपराओं के पुनरुत्थान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यज्ञ की महत्ता और वैश्विक स्तर पर इसकी स्वीकार्यता इसे विशेष बनाती है।


