लखनऊ: राजधानी लखनऊ में बुधवार को एक भावुक और गरम माहौल देखने को मिला जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिव्यांग प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। दिव्यांगजनों ने सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी मांगों और अधिकारों की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। इसके विरोध में उन्होंने सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने “हम भी नागरिक हैं”, “सम्मान चाहिए, सहानुभूति नहीं” जैसे नारे लगाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के लिए बनाई गई सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और ज़मीनी हकीकत कुछ और है।
प्रदर्शन तेज़ होते देख मौके पर भारी पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस ने दिव्यांगजनों को ज़बरदस्ती गाड़ियों में बैठाया और ईको गार्डन ले जाकर प्रदर्शन खत्म करवाया। इस दौरान कुछ दिव्यांगों को जबरन घसीटा गया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
क्या थी प्रमुख मांगें:
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दिव्यांगों को शिक्षा और नौकरी में आरक्षण सुनिश्चित किया जाए
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दिव्यांग पेंशन में बढ़ोतरी की जाए
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सभी जिलों में दिव्यांग सेवा केंद्र खोले जाएं
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सार्वजनिक स्थलों पर दिव्यांगों के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं
कांग्रेस दिव्यांग प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो वे पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ेंगे।
सरकार की चुप्पी पर सवाल:
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार केवल दिखावटी योजनाएं चलाती है, लेकिन ज़रूरतमंदों तक लाभ नहीं पहुंचता। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्वयं दिव्यांगजनों से मिलकर समस्याएं सुननी चाहिए।
पुलिस की सफाई:
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा के बाहर धारा 144 लागू है, ऐसे में इस प्रकार का प्रदर्शन गैरकानूनी था। किसी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया गया, सभी को सुरक्षित तरीके से ईको गार्डन शिफ्ट किया गया।
निष्कर्ष:
लखनऊ में दिव्यांगों के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार सच में हर वर्ग की आवाज़ सुन रही है? जब दिव्यांगजनों को भी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़े और उन्हें जबरन हटाया जाए, तो यह संवेदनशील प्रशासन पर सवाल उठाता है।


