लखनऊ: में यूपी सरकार द्वारा आयोजित रोजगार महाकुंभ ने मंगलवार को युवाओं में उत्साह और हताशा दोनों ही भाव पैदा किए। आयोजन स्थल इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के आसपास तीन दिन के मेले में हिस्सा लेने के लिए युवा रात से ही जुटने लगे। मंगलवार सुबह तक करीब 1 लाख युवाओं का जमावड़ा लग गया।
मेला लगभग 2 किमी क्षेत्र में फैला हुआ था। लेकिन भारी भीड़ और व्यवधान के कारण बायोडाटा कई जगह कूड़े में बिखरे मिले। कुछ युवाओं ने वहां ‘बेरोजगारी हाय-हाय’ के नारे भी लगाए।
सरकार का दावा और लोगों की उम्मीदें
यूपी सरकार ने इस रोजगार मेले में 50 हजार युवाओं को नौकरी मिलने का दावा किया है। मेले में सरकारी और निजी क्षेत्र के विभिन्न रोजगार प्रदाता शामिल थे। हालांकि युवा और उनके अभिभावक उत्साहित तो थे, लेकिन भीड़ और अव्यवस्था ने कई को निराश भी किया।
भीड़ और व्यवस्थापन की चुनौती
मेला स्थल पर सुरक्षा और प्रशासनिक इंतजामों के बावजूद, युवाओं की भारी संख्या को संभालना मुश्किल हो गया। कुछ जगहों पर बायोडाटा फर्श पर बिखरे मिले और युवा परेशान हुए। प्रशासन ने सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए साइनबोर्ड और वॉलिंटियर्स की व्यवस्था की थी, लेकिन भीड़ नियंत्रण की चुनौती बनी रही।
रोजगार मेले का महत्व
इस मेले को युवाओं को सीधी नौकरी देने और रोजगार अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। यह मेले लखनऊ के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने में सहायक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मेले युवाओं में उम्मीद बनाए रखने और सरकार की योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


