अयोध्या: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चमक उठी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष मार्गदर्शन और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों से अयोध्या की रामलीला ने इस वर्ष नया कीर्तिमान रचा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए 50 से अधिक देशों में प्रसारित इस भव्य आयोजन को 62 करोड़ से अधिक दर्शकों ने देखा, जिससे यह विश्व की सबसे बड़ी रामलीला बन गई।
भव्य मंचन और फिल्मी सितारों की मौजूदगी
इस वर्ष की रामलीला में 250 से अधिक फिल्मी कलाकारों ने भाग लेकर मंचन को और भी शानदार बना दिया।
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भाग्यश्री ने माता सीता की भूमिका निभाई
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विंदू दारा सिंह ने हनुमान जी का दमदार किरदार जिया
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शाहबाज खान रावण के रूप में छा गए
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अनिल धवन ने विभीषण की भूमिका निभाई
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सुनिल पाल नारदमुनि बनकर दर्शकों का मन मोह ले गए
इसके अलावा मनोज तिवारी, रवि किशन, राकेश बेदी, रजा मुराद, अशरानी, अवतार गिल, रितु शिवपुरी, शीबा और अरुण बक्शी जैसे सितारों ने भी रामभक्ति की इस गंगा में अपना योगदान दिया।

10 करोड़ रुपये सिर्फ लाइव प्रसारण पर
रामलीला को अधिक से अधिक रामभक्तों तक पहुँचाने के लिए इस वर्ष केवल लाइव प्रसारण पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
यह प्रसारण आराधना टाटा प्ले, शेमारू मी, VI ऐप, एयरटेल, शेमारू भक्ति यूट्यूब चैनल, फेसबुक पेज और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हुआ।
दर्शक संख्या (लाइव):
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शेमारू भक्ति (यूट्यूब) – 8 करोड़
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शेमारू भक्ति धाम (यूट्यूब) – 7 करोड़
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शेमारू मी – 4 करोड़
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आराधना टाटा प्ले – 2 करोड़
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VI ऐप – 5 करोड़
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फेसबुक पेज – 5 करोड़
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टाटा प्ले – 7 करोड़
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शेमारू आराधना टीवी – 7 करोड़
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डिश टीवी – 4 करोड़
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एयरटेल – 3 करोड़
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Videocon – 5 करोड़
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अन्य यूट्यूब प्लेटफॉर्म – 5 करोड़

लगातार बढ़ती लोकप्रियता
कोरोना काल से शुरू हुई यह डिजिटल रामलीला हर साल नए दर्शक रिकॉर्ड बना रही है।
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2020 – 16 करोड़
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2021 – 20 करोड़
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2022 – 25 करोड़
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2023 – 40 करोड़
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2024 – 41 करोड़
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2025 – 62 करोड़ (Google आंकड़े)
योगी सरकार और संस्कृति मंत्रालय का योगदान
रामलीला को विश्व स्तर तक पहुँचाने में योगी आदित्यनाथ सरकार और संस्कृति मंत्रालय की अहम भूमिका रही।
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2020 में तत्कालीन पर्यटन व संस्कृति मंत्री नीलकंठ तिवारी ने इसकी शुरुआत की थी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में आगे बढ़ाया।
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रामलीला समिति के संस्थापक सुभाष मलिक और शुभम मलिक ने इसे डिजिटल क्रांति का प्रतीक बना दिया।

अयोध्या बनी विश्व की सांस्कृतिक राजधानी
यह रामलीला अब सिर्फ भारत की नहीं रही बल्कि पूरी दुनिया की हो चुकी है।
भारत, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, चीन, जापान, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस, ब्राज़ील, रूस समेत 50 देशों में करोड़ों लोगों ने इसे देखा।

वैश्विक स्तर पर रामभक्ति का संदेश
इस रामलीला ने सिद्ध कर दिया कि श्रीराम की कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि विश्व को जोड़ने वाला सांस्कृतिक सेतु है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर वर्ष अयोध्या की रामलीला समिति को शुभकामना पत्र भेजकर आशीर्वाद देते हैं, जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है।


