लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूरे प्रदेश से करीब 20 हजार आशा वर्कर्स सोमवार को लखनऊ के इको गार्डन में जुटीं। उनका उद्देश्य वेतन वृद्धि, मानदेय भुगतान और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर सरकार को संदेश देना था।
ये प्रदर्शन उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन, जो आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन (ACTU) से संबद्ध है, के बैनर तले किया जा रहा है।
⚡ आशा वर्कर्स की मुख्य मांगें
आशा वर्कर्स ने 5 सूत्री मांगें पेश की हैं:
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आशा कर्मियों को 45/46 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार राज्य स्वास्थ्यकर्मी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, ईएसआई, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन गारंटी दी जाए।
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आशा कर्मियों को 10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा गारंटी मिले।
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आशा कर्मियों के काम के घंटे तय किए जाएं।
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2017 से अब तक लंबित भुगतानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
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प्रदेशभर में भुगतान के नाम पर होने वाली वार्षिक घूसखोरी रोकने के लिए निगरानी तंत्र बनाया जाए।
🌞 धूप में बैठे हजारों आशा वर्कर्स
प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स धूप में बैठी हुई थीं, लेकिन उनकी आवाज़ बुलंद थी। लीड कर रहे नेताओं का कहना है कि उनकी जायज मांगें तुरंत मानी जानी चाहिए।
अयोध्या से आई आरती सिंह ने कहा, “हम लोग काम करना चाहते हैं, लेकिन पैसे नहीं मिल रहे। इस बार चुनाव में सिस्टम बदल देंगे। सरकार को वोट नहीं देंगे।”
प्रयागराज की रंजन ने बताया, “11 वर्षों से काम कर रही हूं। वेतन सब्जी मंडी की तरह मिलता है। प्रोत्साहन राशि ₹2000-3500 में आती है, जिसमें आने-जाने का खर्च भी पूरा नहीं होता। टीकाकरण और डिलीवरी के पैसे 9 महीने बाद मिलते हैं।”
🗣️ विरोध का संदेश
आशा वर्कर्स ने कहा कि सरकार उनके कामों को नजरअंदाज कर रही है। रंजना ने चेतावनी दी, “यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो 2027 में इस सरकार को सत्ता में नहीं आने देंगे।”
सभी आशा वर्कर्स ने हाथ उठाकर अपनी मांगें रखीं और नारेबाजी के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाई।


