लखनऊ: में सड़क दुर्घटना में घायल हुए सफाईकर्मी अक्षित वाल्मीकि (20) की 12 दिन बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार को मृतक की डेडबॉडी इंदिरानगर स्थित घर पहुंचते ही मोहल्ले में भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों ने 21 घंटे बाद अंतिम संस्कार किया।
परिजनों का आरोप है कि कार्यदायी कंपनी लखनऊ स्वच्छता अभियान (LSA) ने घायल सफाईकर्मी की कोई मदद नहीं की और चोट के बावजूद उन्हें ड्यूटी कराई।
स्थानीय विरोध और आर्थिक सहायता
दोपहर तक स्थानीय लोगों ने नगर निगम और LSA का विरोध किया। LSA के अधिकारी 10,000 रुपए आर्थिक सहायता देने आए, जिसका विरोध हुआ। नगर आयुक्त को सूचना मिलने के बाद जोन 4 के जोनल अधिकारी संजय यादव मौके पर पहुंचे। नगर निगम और LSA अधिकारियों से बातचीत के बाद 2 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की सहमति बनी। इसके बाद शाम करीब 4 बजे परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।
परिजनों और पार्षदों की प्रतिक्रिया
पार्षद सुरेंद्र वाल्मीकि ने बताया कि मृतक अक्षित वाल्मीकि और उनके परिवार की कोई मदद LSA ने नहीं की। उन्होंने कहा:
“सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद कंपनी ने केवल फर्स्ट ऐड कराया और छोड़ दिया। कोई और मदद नहीं की।”
पार्षद मुकेश चौहान ने कहा कि LSA की लापरवाही के कारण अक्षित की मौत हुई। 29 सितंबर को जनेश्वर मिश्र पार्क के पास कूड़ा उठाते समय अक्षित घायल हुए थे। चोट लगने के बाद 2 अक्टूबर तक उन्हें ड्यूटी कराई गई।
इलाज में चूक
अक्षित के पिता श्याम किशोर ने बताया कि बेटे को चोट लगने के बाद कई अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन उचित इलाज नहीं मिला। उन्होंने कहा:
“लोकल क्लिनिक, राम मनोहर लोहिया अस्पताल, शेखर अस्पताल और शालीमार अस्पताल में इलाज के बावजूद आराम नहीं मिला। पेट में गहरी चोट लगी और शरीर अकड़ गया।”
अंतिम संस्कार और राहत पैकेज
घटना के 21 घंटे बाद परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान LSA की तरफ से 2 लाख रुपए कैश परिजनों को दिए गए। नगर निगम के जोनल अधिकारी और पार्षदों ने प्रधानमंत्री आवास योजना में घर, ESIC और अन्य लाभ देने का आश्वासन भी दिया।


