लखनऊ: में दिवाली के दौरान डॉग बाइट के मामलों में सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना से अधिक इजाफा देखा गया। पटाखों के शोर और धमाकों के बीच कुत्ते खूंखार हो गए और चार बड़े सरकारी अस्पतालों में 300 से अधिक मरीजों को भर्ती कराया गया।
आमतौर पर लखनऊ में रोजाना लगभग 100 डॉग बाइट के मामले आते हैं, लेकिन इस दिवाली सीजन में केवल तीन बड़े सरकारी अस्पतालों में ही यह संख्या 200 के पार पहुंच गई। प्रभावित लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन (ARV) की डोज दी गई, जबकि कुछ को इम्यूनो ग्लोबलिन की भी सलाह दी गई।
मुख्य आंकड़े:
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राजनारायण लोकबंधु संयुक्त अस्पताल में 2 दिन में 264 डॉग बाइट के मामले आए।
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बलरामपुर अस्पताल में 4 दिनों में 265 मरीजों को ARV दी गई।
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में 3 दिनों में 173 केस दर्ज हुए।
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आलमबाग के 50 बेड संयुक्त चिकित्सालय में भी सामान्य दिनों की तुलना में दोगुना डॉग बाइट केस दर्ज हुए।
एक्सपर्ट्स की राय:
लखनऊ के सिविल अस्पताल के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश श्रीवास्तव के अनुसार, पिछले एक दशक में दिवाली के दौरान डॉग बाइट के मामलों में लगातार इजाफा देखा गया है। पटाखों की तेज आवाज और बारूद की गंध से कुत्ते डर और आक्रामकता का अनुभव करते हैं, जिससे डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
डॉग एक्सपर्ट डॉ. एपी यादव ने बताया कि डॉग बाइट बढ़ने के तीन प्रमुख कारण हैं:
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दिवाली के दौरान बर्निंग सेंसेशन और बारूद की गंध से कुत्तों का इरिटेशन।
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पटाखों के तेज धमाके से डॉग में डर और आक्रामकता का बढ़ना।
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अक्टूबर-नवंबर का ब्रीडिंग सीजन, जब फीमेल डॉग हॉट सीजन में होती हैं और मेल डॉग अधिक एग्रेसिव रहते हैं।
स्ट्रीट डॉग इस शोर और धमाकों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, लेकिन पालतू कुत्तों में भी आक्रामकता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि डॉग बाइट की स्थिति में तुरंत ARV इंजेक्शन लिया जाए।


