लखनऊ। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अखिल भारतीय असंगठित कामगार प्रकोष्ठ के चेयरमैन डॉ. उदित राज ने रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती पर तीखा हमला बोला।
लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने मायावती को “बीजेपी की एजेंट” बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जिताने का काम किया, अब वे बिहार चुनाव में भी भाजपा को फायदा पहुंचाने में लगी हैं।
🗣️ ‘मायावती की जुबान पर अंबेडकर, दिल में कमल’
उदित राज ने कहा —
“मायावती की जुबान पर अंबेडकर हैं, लेकिन दिल में कमल है। उन्होंने यूपी में भाजपा को जिताया और अब बिहार का ठेका ले लिया है। कांशीराम की जयंती पर पहली बार रैली की, लेकिन उसमें योगी आदित्यनाथ की तारीफ और सपा पर सवाल उठाए। यह रैली बहाना थी, असली मकसद था बिहार में बीजेपी को मदद देना।”
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछे जाने चाहिए, न कि विपक्ष से।
⚖️ उदित राज की चार प्रमुख बातें
1️⃣ बिहार में चुनाव जिताने का ठेका लिया
उदित राज ने आरोप लगाया कि मायावती भाजपा के इशारे पर काम कर रही हैं।
“मायावती ने मुसलमानों को जोड़ने की बात कही, लेकिन वे कभी उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर या गुलफिशा फातिमा जैसे बंद मुस्लिम कार्यकर्ताओं की रिहाई पर कुछ नहीं बोलतीं। उनकी खामोशी बताती है कि उनकी निष्ठा कहाँ है।”
2️⃣ आईपीएस वाई पूरन कुमार की मौत पर मौन
उन्होंने कहा —
“दलित अधिकारी वाई पूरन कुमार की हत्या पर मायावती चुप क्यों हैं? हजारों सेवानिवृत्त अधिकारी चुप बैठे हैं, इसी का नतीजा है कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस गवई पर जूता फेंका गया।”
3️⃣ यूपी में दलितों पर अत्याचार बढ़ा
“उत्तर प्रदेश में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। हरिओम वाल्मीकि की हत्या इसका ताजा उदाहरण है।
कानपुर देहात में दलित रसोइया मूत्री देवी से शौचालय साफ करवाया गया, लेकिन दो महीने बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।”
4️⃣ मजदूरों के खिलाफ नीति
“योगी सरकार का आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड बनाना मजदूरों के अधिकारों पर हमला है।
16 से 20 हजार रुपए के मानदेय पर तीन साल की नौकरी देना संविदा शोषण को वैध बनाना है।
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 2002 से सभी आउटसोर्स कर्मियों को नियमित किया जाए।”
👤 पूर्व आयकर अधिकारी से कांग्रेस नेता तक का सफर
डॉ. उदित राज, 2014 से 2019 तक उत्तर-पश्चिम दिल्ली से सांसद रह चुके हैं। वे पहले भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में आयकर अधिकारी थे।
उन्होंने दलित-आदिवासी संगठन परिसंघ (DOMA Confederation) की स्थापना की थी और लंबे समय से दलित अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।
2019 में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा और अब पार्टी के प्रमुख दलित चेहरों में से एक हैं।
🔍 पृष्ठभूमि: बिहार चुनाव से पहले बयान का असर
उदित राज का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में भाजपा अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटी है।
बसपा सुप्रीमो मायावती हाल में बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर सक्रिय नजर आ रही हैं।
कांग्रेस इसे भाजपा को फायदा पहुंचाने की रणनीति के रूप में देख रही है।


